खतरनाक AQI स्तर फतेहगढ़ साहिब में, पराली जलाने पर 12 किसानों पर कार्रवाई!

पंजाब में धान की पराली जलाने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जबकि राज्य सरकार इस पर रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाने और जागरूकता कार्यक्रम चलाने का दावा कर रही है। हाल ही में फतेहगढ़ साहिब और खन्ना जिलों में एक सप्ताह के भीतर पराली जलाने के बारह से अधिक मामले सामने आए हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, खासकर तब जब एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 230 के स्तर तक पहुंच गया है। इसका असर खासतौर पर अस्थमा के मरीजों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। अगर यह स्थिति नियंत्रण में नहीं आई, तो प्रदूषण स्तर और बढ़ सकता है, जिससे स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर हो सकती हैं।

एयर क्वालिटी इंडेक्स अगर 200 से पार जाता है, तो इसे खतरे की निशानी माना जाता है और इसे पुअर (POOR) दर्जा दिया जाता है। 300 के पार जाने पर इसे वेरि पुअर श्रेणी में रखा जाता है। लोहा नगरी मंडी गोबिंदगढ़ में पिछले तीन दिनों से AQI लगातार 200 के ऊपर बना हुआ है। खन्ना में भी इसी तरह की स्थिति है, जहाँ AQI का स्तर 200 के पार पहुंच गया है। दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान आतिशबाजी के चलते प्रदूषण स्तर और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे स्थिति और भयावह हो सकती है।

फतेहगढ़ साहिब और खन्ना में दर्ज मामलों की बात करें, तो यहां की पुलिस ने पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर से प्राप्त जानकारी के आधार पर कार्रवाई की। खन्ना में समराला इलाके में कई स्थानों पर पराली को आग लगाई गई। फतेहगढ़ साहिब के अमलोह, बस्सी पठाना और मंडी गोबिंदगढ़ में भी पिछले दो दिनों में इसी तरह की घटनाएं हुईं हैं। फिलहाल, पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं और आरोपियों की पहचान के लिए जमीन के दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

फतेहगढ़ साहिब के एसडीएम मनजीत सिंह राजला ने कलस्टर अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें उन्हें निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखें। उन्होंने यह भी कहा कि बिना एसएमएस के चलने वाली कंबाइन की नियमित रूप से जांच की जाए। इसी प्रकार, खन्ना में पुलिस अधीक्षक अश्विनी गोत्याल के निर्देश पर, पुलिस अधिकारी खुद खेतों में जाकर किसानों को पराली जलाने के नुकसान और इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जागरूक कर रहे हैं।

इस स्थिति में, यह स्पष्ट है कि सरकार और संबंधित अधिकारियों के प्रयासों के बावजूद, पराली जलाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इसलिए आवश्यक है कि इस दिशा में और कठोर कदम उठाए जाएं, ताकि न केवल पर्यावरण की सुरक्षा की जा सके बल्कि स्वास्थ्य समस्याओं से भी निपटा जा सके। यदि समय रहते इस गंभीर मुद्दे का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदूषण का संकट बढ़कर और भी विकट रूप धारण कर सकता है।