बरनाला में किसानों का उग्र प्रदर्शन: छोटे व्यापारों पर कॉरपोरेट कब्जे के खिलाफ अलर्ट!

पंजाब के बरनाला में भारतीय किसान यूनियन उगराहां से जुड़े किसानों ने आज एक महत्वपूर्ण मार्च का आयोजन किया। इस मार्च का मुख्य उद्देश्य बरनाला शहर के बाजारों में व्यापारियों और दुकानदारों को सरकार की किसान, मजदूर और व्यापार विरोधी नीतियों के प्रति जागरूक करना था। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन उगराहां के जिला अध्यक्ष चमकौर सिंह नैनेवाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि कैसे बड़े कॉरपोरेट कंपनियों का भारत में प्रवेश छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के लिए खतरा बन रहा है। उन्हें विश्वास है कि इन कंपनियों की वजह से छोटी दुकानें और व्यापार धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे।

चमकौर सिंह ने आगे कहा कि आज बाजार में दुकानदारों को एक पर्चा वितरित किया गया है, जिसमें कॉरपोरेट कंपनियों के एजेंडे की विस्तार से जानकारी दी गई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों को मंडियों में जिस तरह से परेशान किया जा रहा है, उससे स्पष्ट है कि खेती पर कॉरपोरेट का कब्जा किए जाने की योजना बनाई गई है। उनका मानना है कि यह सिर्फ एक किसान का मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे पूरे पंजाब के व्यापार और दुकानदारी पर गहरा असर पड़ेगा।

चुनाव के नजदीक आते ही व्यापारियों और दुकानदारों की जागरूकता का महत्व और भी बढ़ गया है। नैनेवाल ने कहा कि ऐसे समय में जब देशभर में बड़े हाईवे और मॉल बन रहे हैं, छोटी दुकानें और व्यापार समाप्त होने की कगार पर हैं। इसका आर्थिक प्रभाव छोटे दुकानदारों पर भी पड़ेगा, इसीलिए उन्हें अपनी आवाज उठाने और सरकार से सवाल पूछने की आवश्यकता है। पहले यह संघर्ष केवल किसानों और मजदूरों के बीच सीमित था, लेकिन अब यह पूरे समुदाय को प्रभावित कर रहा है।

संगठन के सदस्य यह मानते हैं कि अगर पंजाब की कृषि संकट में आती है, तो यह केवल किसानों के लिए नहीं, बल्कि व्यापारियों और दुकानदारों के लिए भी संकट का कारण बनेगा। इसलिए, दुकानदारों और व्यापारियों को चाहिए कि वे एकजुट होकर इस स्थिति का विरोध करें और किसान आंदोलन का समर्थन करें। इससे न केवल उनके अपने व्यवसाय की रक्षा होगी, बल्कि यह कॉरपोरेट नीतियों के खिलाफ एक मजबूत संघर्ष का हिस्सा भी बनेगा।

अंत में, भारतीय किसान यूनियन उगराहां के कार्यकर्ताओं ने व्यापारी वर्ग से अपील की कि वे अपनी जिम्मेदारियों को समझें और इस लड़ाई में किसानों के साथ खड़े हों। जागरूकता फैलाने के इस प्रयास का उद्देश्य न केवल किसानों के अधिकारों की रक्षा करना है, बल्कि छोटे व्यापारियों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करना है। यदि सभी मिलकर इस संघर्ष में भाग लेते हैं, तो यह कॉरपोरेट विरुद्ध एक शक्तिशाली आंदोलन बन सकता है।