अडानी सोलर विवाद: किसान नेता का CM मान पर वार, 12 राज्यों के समझौते की मांग!

24 अक्टूबर 2024 को अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने गौतम अडानी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण मुकदमा दर्ज किया। इस घटनाक्रम के चलते भारत में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने इस मामले को लेकर बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने सीएम भगवंत सिंह मान और अन्य राजनीतिक दलों पर गंभीर आरोप लगाए। पंधेर ने आम आदमी पार्टी की सरकार से जवाब मांगा है और इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पंधेर के अनुसार, अमेरिका में करीब दो वर्षों तक चली जांच के बाद अडानी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिसके संदर्भ में गिरफ्तारी का वारंट भी जारी किया गया। उन्होंने कहा कि कुछ राज्य सरकारों ने पहले सोलर पावर के महंगे होने के कारण इस पर आपत्ति जताई थी, लेकिन फिर भी इस बिजली समझौते के लिए लगभग 2200 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल विरोधी सरकारें ही नहीं, बल्कि डबल इंजन की सरकारें भी इस मामले में शामिल हैं।

किसान नेता ने कहा कि अडानी के खिलाफ लगाए गए आरोपों से देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनामी हुई है। उनका मानना है कि यह मामले में पीएम मोदी को सीधी कार्रवाई करने की जरूरत है, ताकि सच सबके सामने आ सके। पंधेर ने यह भी कहा कि इस समझौते का दायरा 12 राज्यों तक फैला हुआ है और खासकर, पंजाब के सीएम भगवंत सिंह मान को स्पष्ट करना चाहिए कि अडानी के साथ समझौता किस आधार पर किया गया था।

पंधेर ने आगामी 26 नवंबर को खनौरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन में भारी संख्या में जुटने की योजना का भी ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर को किसानों का एक बड़ा दल दिल्ली की ओर कूच करेगा। इसके साथ ही, उन्होंने पंजाब में आ रही स्पेशल ट्रेनों की संख्या को लेकर सवाल उठाए और कहा कि सरकार गेहूं के उत्पादन के प्रबंधन में विफल साबित हो रही है। उनका आरोप है कि सरकार चाहती है कि किसान अपनी फसलें अडानी और अंबानी के गोदामों में रखने के लिए मजबूर हों।

यह सारा घटनाक्रम इस बात की ओर संकेत करता है कि भारतीय राजनीति में व्यवसायिक जगत के साथ सरकारों के संबंधों पर सवाल उठने लगे हैं। किसानों की यह मांग कि सब कुछ पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए, एक बार फिर से इस मुद्दे को प्रासंगिक बना दिया है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद का राजनीतिक असर किस दिशा में जाता है और क्या सरकार इस मामले की गंभीरता को समझते हुए उचित कदम उठाएगी।