पंजाब की डेरा बाबा नानक विधानसभा सीट पर हुई उपचुनाव की मतगणना में आम आदमी पार्टी (आप) ने शानदार जीत हासिल की है। सुखजिंद्र ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट, गुरदासपुर में सुबह 8 बजे से शुरू हुई इस मतगणना का सिलसिला 18 राउंड तक जारी रहा। इस मौके पर डिप्टी कमिश्नर और जिला चुनाव अधिकारी गुरदासपुर, श्री उमा शंकर गुप्ता ने बताया कि आप के उम्मीदवार गुरदीप सिंह रंधावा ने इस चुनाव में 5699 वोटों की बढ़त के साथ विजय प्राप्त की। उन्हें कुल 59104 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की उम्मीदवार श्रीमती जतिंदर कौर रंधावा को 53405 वोट मिले। इसी तरह भाजपा के रविकरण सिंह काहलो को 6505 वोट मिले, और शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के उम्मीदवार लवप्रीत सिंह तूफान को 2358 वोट मिले।
मतगणना में बेहद रोचक मंजर देखने को मिला। 10वें राउंड में नेता बदलने के बाद आम आदमी पार्टी ने 63.2 प्रतिशत मतदान से अपना प्रभाव बनाए रखा। दसवें राउंड तक कांग्रेस पार्टी आगे चल रही थी, लेकिन इसके बाद आप ने मजबूत वापसी करते हुए बढ़त बना ली। इस राउंड में गुरदीप सिंह रंधावा को 36832 वोट मिले, जो जतिंदर कौर के 35450 वोट से 1382 अधिक थे। 9वें राउंड में रंधावा ने 1191 वोटों के अंतर से सफलता पाई थी।
उपचुनाव में कुल 11 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन मुख्य मुकाबला आप और कांग्रेस के बीच ही रहा। कांग्रेस की तरफ से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की पत्नी जितेंद्र कौर निलंबित थीं। चुनाव परिणामों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद डिप्टी कमिश्नर ने मतदान प्रक्रिया के सफलतापूर्वक संपन्न होने के लिए सभी संबंधितों का धन्यवाद दिया और उन्हें भविष्य में भी इस प्रकार की सफलताओं की शुभकामनाएं दीं।
मतदान की प्रक्रिया के दौरान शांतिपूर्ण माहौल को बनाए रखने के लिए सभी नागरिकों, पुलिस अधिकारियों और मतदान कर्मियों का आभार व्यक्त किया गया। डेरा बाबा नानक उपचुनाव में आप ने जिस प्रकार से रणनीतिक तरीके से आगे बढ़कर वोट काटे, उसने साबित कर दिया कि पंजाब की राजनीति में आम आदमी पार्टी की धाक अब और भी मजबूत हो रही है।
विशेष रूप से डेरा बाबा नानक सीट पर यह जीत आम आदमी पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण जीत मानी जा रही है, जो आगामी चुनावों में उनकी संभावनाओं को और मजबूत करेगी। क्षेत्रों में आप की बढ़ती लोकप्रियता और समर्थन ने एक नया उत्साह भर दिया है, जो पार्टी को भविष्य में अन्य क्षेत्रों में भी जीत दिला सकता है। इस प्रकार, इस उपचुनाव ने न केवल डेरा बाबा नानक की राजनीति को प्रभावित किया, बल्कि पंजाब की राजनीतिक परिदृश्य में भी एक नया मोड़ दिया है।