फाजिल्का अबोहर हाईवे के निकट स्थित एक झोपड़ी से क्षति ग्रस्त धार्मिक मूर्तियों के मिलने से क्षेत्र में एक बार फिर धार्मिक भावनाएं उभर आईं। इस घटना का विरोध करते हुए हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों के नेतृत्व में शिवसेना के जिला अध्यक्ष उमेश कुमार और पंकज नारंग मौके पर पहुंचे। इन लोगों ने पुलिस बल की उपस्थिति में उन सभी खंडित मूर्तियों को झोपड़ी से बाहर निकाला और उन्हें खुईखेड़ा ले जाने का निर्णय लिया, जहां इनका जल विसर्जन किया जाएगा।
शिवसेना जिलाध्यक्ष उमेश कुमार और पंकज नारंग ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि क्षेत्र में गणेश महोत्सव के दौरान बाहरी लोग फाजिल्का में गणेश जी की मूर्तियाँ बनाकर बिक्री करते हैं। महोत्सव समाप्त होने के बाद यह लोग अपने गृहनगर लौट जाते हैं, लेकिन उनकी झोपड़ियों में गणेश जी की कई मूर्तियां खंडित अवस्था में पाई गई। यह स्थिति स्थानीय हिंदू संगठनों के लिए चिंता का विषय बनी है, जिसके चलते वे तुरंत घटना स्थल पर पहुँचे और सभी मूर्तियों को एकत्र किया।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी बताया कि जहां ये मूर्तियाँ बनाई जा रही थीं, वहां शराब की बोतलें और चिकन की हड्डियाँ भी मौजूद थीं। ऐसे में हिंदू संगठनों के लोगों में आक्रोश उत्पन्न हुआ है और उन्होंने पुलिस प्रशासन से ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की। उनका कहना है कि धार्मिक वस्तुओं की इस तरीके से अवहेलना न केवल उनके लिए अपमानजनक है, बल्कि यह समाज की धार्मिक भावनाओं को भी आहत करती है।
फाजिल्का सदर थाना के SHO शिमला रानी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद वे जांच पड़ताल करेंगे और यदि आवश्यकता पाई गई तो उचित कार्रवाई करेंगे। पुलिस ने कहा कि यह मामला संवेदनशील है और इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाएगा। उनकी कोशिश है कि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके और शहर में सामंजस्य और भाईचारा बना रहे।
इस घटना ने स्थानीय समुदाय में धार्मिक भावनाओं को उभारा है और साथ ही सामाजिक सद्भावना की आवश्यकता को भी प्रदर्शित किया है। लोगों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल धार्मिक स्वरूप को प्रभावित करती हैं, बल्कि सामाजिक बंधनों को भी कमजोर करती हैं। आगे आने वाले समय में इस मुद्दे पर क्या समाधान निकलता है, यह देखना होगा।