पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में ब्वॉयज हॉस्टल नंबर-3 के कोऑपरेटिव मैस को फिर से चालू करने की योजना बन रही है। यह मैस कोविड-19 महामारी के कारण लंबे समय से बंद थी। हॉस्टल नंबर-3 का यह कोऑपरेटिव मैस पूरे परिसर में अनूठा था, जहां छात्र स्वयं मिलकर खाने की व्यवस्था का संचालन करते थे। इसमें खाद्य सामग्री की खरीदारी से लेकर मेन्यू तैयार करने की जिम्मेदारी भी छात्रों पर थी। हॉस्टल वार्डन ने मैस को फिर से शुरू करने के लिए तीन लाख रुपये की राशि जारी की है, जो प्रारंभिक खर्चे के लिए उपयोग की जाएगी। इस राशि को बाद में मैस की आय से वापस फंड में जमा किया जाएगा, यह प्रक्रिया भविष्य में भी इसी तरह जारी रहेगी।
कोऑपरेटिव मैस में खाने की थाली की कीमत छात्रों के लिए केवल 28 से 30 रुपये होगी, जबकि अन्य मैस में यह राशि 45 रुपये तक पहुंच जाती है। इस मैस के पुनः शुरू होने के लिए 120 छात्रों ने अपनी रुचि दिखाई है, जबकि संचालन के लिए कम से कम 70 छात्रों का होना आवश्यक है। अभी इस मैस के सैक्रेटरी का चयन किया जा रहा है। कोऑपरेटिव मैस की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली सब्ज़ियां और ब्रांडेड आटा खरीदने की अनुमति होती है, जबकि अन्य मैस में यह जिम्मेदारी ठेकेदार पर होती है, जिससे अक्सर स्वच्छता से संबंधित शिकायतें आती हैं।
इसके साथ ही, हॉस्टल नंबर-3 के सुधार कार्य भी तेजी से चल रहे हैं। नए वाशिंग शेड का निर्माण किया गया है, जिसमें शीघ्र ही तीन स्वचालित वाशिंग मशीनें स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा, हॉस्टल में 20 छात्रों की क्षमता वाला एक रीडिंग हॉल भी बनेगा, जिसके लिए लेआउट योजना पहले ही मंजूर हो चुकी है और निर्माण कार्य जल्द ही शुरू हो जाएगा। हॉस्टल परिसर में एक बैडमिंटन कोर्ट भी बनाया जाएगा। वार्डन डॉ. सुच्चा सिंह ने कहा है कि कोरोना के कारण बंद पड़े कोऑपरेटिव मैस को जल्द से जल्द चालू करने की प्रक्रिया चल रही है।
पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में कुल 18 हॉस्टल हैं, जिनमें 8 लड़कों के और 10 लड़कियों के छात्रावास शामिल हैं। इसके अलावा, एक अंतर्राष्ट्रीय हॉस्टल और कार्यरत महिलाओं का हॉस्टल भी परिसर में मौजूद है। इस कोऑपरेटिव मैस का पुनः खुलना निश्चित रूप से छात्रों के लिए एक लाभकारी कदम साबित होगा। इससे न केवल उनकी आर्थिक बोझ में कमी आएगी, बल्कि स्वच्छता और खाद्य गुणवत्ता में भी सुधार होगा। इस प्रकार की पहल छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने और सामूहिक सहयोग की भावना को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगी।