किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का अनशन पंजाब और हरियाणा के खनौरी बॉर्डर पर अब 77वें दिन में प्रवेश कर गया है। पिछले कुछ दिनों से उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी अधिकतर नसें ब्लॉक हो गई हैं, जिससे उन्हें मेडिकल सुविधाएं देने में कठिनाई हो रही है। इस समय डल्लेवाल बिना किसी चिकित्सा सहायता के अनशन कर रहे हैं, और उनकी स्थिति लगातार बिगड़ रही है। किसान संगठनों की ओर से आज (10 फरवरी) को एक बैठक का आयोजन किया गया है जिसमें एकता और संघर्ष के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
संयुक्त किसान मोर्चे (एसकेएम) के नेता सवरन सिंह पंधेर ने इस बात का ऐलान किया है कि अगर केंद्र सरकार द्वारा 14 फरवरी को प्रस्तावित बैठक बेकार साबित होती है, तो किसान 25 फरवरी को दिल्ली की ओर पैदल मार्च करेंगे। उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि पहले भी किसानों की एकता को लेकर मीटिंग हुई थी और अब फिर से यह जरूरी हो गया है। पंधेर ने यह भी कहा कि किसानों को एकजुटता के साथ संघर्ष करना होगा, ताकि उनकी आवाज और مطالبों को सरकार तक पहुँचाया जा सके।
पंधेर ने मीडिया से बातचीत में यह भी स्पष्ट किया कि किसानों ने केंद्र सरकार की कृषि मार्केट नीति पर सवाल उठाया है। उनकी मांग है कि कृषि नीति के ड्राफ्ट को मांग पत्र में शामिल किया जाए और कारपोरेट पर सीधे प्रहार किया जाए। उन्होंने उल्लेख किया कि इस पर उनकी टीम पहले से ही प्रैक्टिकल काम कर रही है। हालांकि, एसकेएम का लक्ष्य संपूर्ण एकता है, और अब यह स्पष्ट करना होगा कि क्या सभी किसान दल एकजुट होकर इस संघर्ष में शामिल होने के लिए तैयार हैं।
किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि जगजीत सिंह डल्लेवाल की हालत बेहद नाजुक है। उनकी नसें लगातार ब्लॉक हो रही हैं, जिससे डॉक्टरों को ड्रिप लगाने में दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में उन्हें अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच, कोटड़ा ने भी लोगों से अपील की है कि वे मोर्चे पर पहुँचकर इस आंदोलन को मजबूत करें।
कोटड़ा ने कहा कि पिछले वर्ष से चल रहे इस मोर्चे ने कई सफल कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिसमें 4 जनवरी को हुई महापंचायत भी शामिल है। इस महापंचायत में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। अब जब मोर्चा एक साल पूरा करने जा रहा है, तो सरकार के साथ होने वाली बैठक से पूर्व सभी किसानों का एकजुट होना आवश्यक है। उन्होंने सभी वर्गों—युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं से अपील की है कि वे इस आंदोलन में शामिल होकर सरकार पर दबाव बनाने में मदद करें।
इस प्रकार, डल्लेवाल का अनशन और किसानों का संघर्ष अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, और देखने वाली बात होगी कि सरकार इस स्थिति के प्रति क्या प्रतिक्रिया देती है।