हरियाणा के जिंद जिले से निकली रेखा गुप्ता ने दिल्ली राजनीतिक परिदृश्य पर एक नया अध्याय आरंभ किया है, जब वे अब दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगी। यह सजीव उदाहरण है कि छोटे राज्यों से भी बड़ी राजनीति का उदय हो सकता है। रेखा गुप्ता का जन्म 19 जुलाई 1974 को हुआ और उनका परिवार हरियाणा के जुलाना क्षेत्र से ताल्लुक रखता है। उनके पिता, जयभगवान, बैंक ऑफ इंडिया में मैनेजर के रूप में कार्यरत थे और इसके चलते उनका परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया, जहां रेखा ने अपनी स्कूली शिक्षा समेत कानून की पढ़ाई पूरी की।
दिल्ली में रेखा के राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र जीवन से हुई थी, जब उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संपर्क स्थापित किया। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी, आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़ी हैं और इससे पहले वे दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुकी थीं। हालाँकि, यह तीसरी बार वो विजयी रहीं और शालीमार बाग क्षेत्र से अपनी प्रतिद्वंदी वंदना को बड़े अंतर से हराया। उनकी जीत ने न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि को दर्शाया, बल्कि यह भी साबित किया कि लोग उनके नेतृत्व गुणों पर विश्वास करते हैं।
इसमें कोई संदेह नहीं है कि रेखा गुप्ता का नाम इतिहास में लिखा जाएगा, क्योंकि वे हरियाणा की पहली मुख्यमंत्री हैं जो दिल्ली के मुख्यमंत्री का पद संभालेंगी। इससे पहले सुषमा स्वराज और अरविंद केजरीवाल, दोनों का संबंध हरियाणा से रहा है। जबकि सुषमा स्वराज ने 1998 में दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, वहीं केजरीवाल ने 2013 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की दिग्गज नेता शीला दीक्षित को हराया था।
भारत की राजनीति में हरियाणा का योगदान एक लंबा इतिहास रखता है। सुषमा स्वराज और केजरीवाल जैसे नेताओं को तैयार करने में इस राज्य की भूमिका अद्वितीय रही है। रेखा गुप्ता की जीत ने फिर से यह साबित कर दिया कि हरियाणा से निकलने वाले नेताओं में नेतृत्व की गहरी बुनियाद है। उनके पति मनीष, जो स्पेयर पार्ट व्यवसाय में हैं, ने हमेशा रेखा का समर्थन किया है, जिससे उनकी राजनीतिक यात्रा और भी समृद्ध हुई है।
दिल्ली में उनके मुख्यमंत्री बनने की घोषणा के बाद, जिंद जिले के जुलाना में लोगों ने खुशी का इजहार किया और मिठाईयां बांटी। यह क्षण न केवल रेखा गुप्ता के लिए, बल्कि हरियाणा और दिल्ली के लिए भी गर्व का अवसर है। यह नई कहानी हमें बताती है कि किस प्रकार निरंतर प्रयास और मेहनत के माध्यम से कोई भी अपनी पहचान बना सकता है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र से क्यों न हो। रेखा गुप्ता का यह सफर उन्हें न केवल सियासी गलियारों में एक नई पहचान देगा, बल्कि उनके लिए कई चुनौतियों और अवसरों का भी द्वार खोलेगा।