रागिनी का फंडा: मंदिर में साधना, हनी सिंह के साथ बिना जानें गाया गाना!

बॉलीवुड के मशहूर गायक यो-यो हनी सिंह का नया गाना ‘मेनियाक’ तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो रहा है। इस गाने में पंजाबी और भोजपुरी का अनोखा मिश्रण देखने को मिल रहा है। इसकी एक विशेष लाइन ‘दीदिया के देवरा चढ़वले बाटे नजरी’ इतनी लोकप्रिय हो गई है कि इसे बिहार और उत्तर प्रदेश के अलावा पूरे देश में सुना जा रहा है। हनी सिंह के भोजपुरिया अंदाज ने नेटिजन्स का ध्यान खासा आकर्षित किया है। इसके साथ ही इस गाने में अभिनेत्री ईशा गुप्ता ने भी अपने अभिनय के लिए काफी सराहना बटोरी है।

इस गाने की रचना और गायन करने वाले कलाकारों में सबसे ज्यादा चर्चा रागिनी विश्वकर्मा और लिरिसिस्ट अर्जुन अजनबी की हो रही है। दैनिक भास्कर की टीम ने उनसे बातचीत की ताकि इस गाने के निर्माण की प्रक्रिया को समझा जा सके। रागिनी ने बताया कि उन्हें हनी सिंह के साथ गाने का प्रस्ताव विनोद वर्मा ने दिया था, और जब उन्होंने यह बताया कि यह गाना बॉलीवुड में रिलीज होगा, तब उन्होंने सोचा था कि यह केवल एक साधारण गाना होगा। जब तक गाना फाइनल हुआ और टीजर आया, तब तक रागिनी को जानकारी नहीं थी कि वह हनी सिंह के साथ गाने का मौका पा रही हैं।

गाने की शूटिंग बनारस में किन्नाराम बाबा मंदिर के एक स्टूडियो में की गई थी, जहां पर रागिनी और टीम ने छह दिनों तक रिहर्सल की। उन्होंने बताया कि यह गाना करीब डेढ़ महीने पहले रिकॉर्ड किया गया था। अर्जुन अजनबी ने बताया कि उनकी टीम ने चार डमी गाने बनाए और अंततः यह गाना फाइनल हुआ। अर्जुन ने गाने के लिरिक्स की द्विअर्थी बातें करते हुए कहा कि आजकल के गानों में कुछ चटक होना जरूरी है, ताकि वह लोगों का ध्यान आकर्षित कर सके।

रागिनी विश्वकर्मा का परिवार उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित तरकुलहा मंदिर के पास रहता है। वह बताती हैं कि उनका पूरा परिवार मंदिर के परिसर में ढोलक और हारमोनियम के साथ गाकर पैसे कमाता है। उनके लिए यह कोई नई बात नहीं है, क्योंकि वे बचपन से ही मुंडन जैसे धार्मिक आयोजनों में गा रही हैं। हालांकि, लॉकडाउन के दौरान उनका एक गाना वायरल हुआ था, जिससे उन्हें कुछ पहचान मिली।

हालांकि, रागिनी ने कहा कि भोजपुरी गानों में उन्हें कई बार अन्य गायकों के साथ गाने का मौका नहीं मिलता। उन्होंने खेसारी लाल यादव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने एक बार कहा था कि साथ में गाएंगे, लेकिन अभी तक यह संभव नहीं हो सका। इस बीच, एक चिंतित सन्देश आया है कि बड़े गायक रागिनी जैसे नए कलाकारों को मौका देने में बहुत कम रुचि दिखाते हैं।

भोजपुरी भाषा के जानकार निराला विदेसिया ने इस विषय पर चिंता व्यक्त की है कि इस तरह के गाने भोजपुरी की संस्कृति को नुकसान पहुँचा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि हनी सिंह ने पारंपरिक भोजपुरी धुनों का इस्तेमाल किया होता तो यह बेहतर होता। ऐसे में भाषा और संस्कृति के मामले में हमें संजीदगी से सोचना होगा, ताकि नए और प्रतिभाशाली कलाकारों को सही मायनों में मौका मिल सके।