हाथरस की एमपी-एमएलए अदालत में आज कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दायर परिवाद की सुनवाई होने जा रही है। इस याचिका में राहुल गांधी पर अपमानजनक पोस्ट डालने और न्याय का अपमान करने का आरोप लगाया गया है। पिछले मामले की सुनवाई 10 फरवरी को होनी थी, लेकिन न्यायिक अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण इसे अब 1 मार्च को के लिए स्थगित कर दिया गया है। यह मामला बूलगढ़ी गांव से जुड़ा है, जहां राहुल गांधी ने 12 दिसंबर को पीड़िता के परिवार से मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि रेप पीड़िता के परिवार को घर में बंद रखना और आरोपियों का आजाद घूमना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
इस मामले में तीन आरोपी – रवि, रामू और लवकुश – पहले ही बरी हो चुके हैं। उनके वकील मुन्ना सिंह पुंडीर ने राहुल गांधी को 1.5 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजा था। नोटिस में बताया गया था कि तीनों आरोपियों के लिए 50-50 लाख रुपये की मांग की गई है। पुंडीर का कहना था कि कोर्ट से बरी होने के बाद इन आरोपियों ने समाज में एक सामान्य जीवन जीना शुरू कर दिया था, लेकिन राहुल गांधी द्वारा किए गए पोस्ट ने उनकी जिंदगी को फिर से प्रभावित किया है। उनका यह भी कहना था कि अदालत ने इसे रेप केस नहीं माना है, लेकिन राजनीति के कारण राहुल गांधी ने जो पोस्ट किया, उससे तीनों की जिंदगी में फिर से कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।
यह मामला 14 सितंबर 2020 को बूलगढ़ी गांव में हुई एक दलित युवती के साथ दरिंदगी से संबंधित है। 29 सितंबर 2020 को युवती ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया था। पुलिस ने परिवार की अनुमति के बिना ही युवती का रात के समय अंतिम संस्कार कर दिया था, जिससे परिवार में काफी नाराजगी पैदा हुई थी। यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना था, और जब यूपी पुलिस की जांच पर सवाल उठे, तो इसे सीबीआई को सौंप दिया गया था। अंत में, अदालत ने तीन आरोपियों को बरी कर दिया, और इसे गैर इरादतन हत्या का मामला मानकर संदीप को दोषी ठहराया था, जो अभी भी जेल में हैं।
इस मामले में राहुल गांधी के बयान और उन पर लगाए गए आरोपों ने देश में राजनीति में नए विवाद को जन्म दिया है। भारतीय राजनीति में इस तरह के मुद्दे अक्सर संवेदनशील बन जाते हैं। इसलिए देखें कि अदालत में आज की सुनवाई में क्या निर्णय आता है और इसका विपरीत प्रभाव क्या हो सकता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, यह भी देखने का विषय रहेगा कि क्या राहुल गांधी इस मामले में अपने बयान पर विचार करेंगे या फिर इसे भी अपनी राजनीतिक रणनीति में शामिल करेंगे।