पूर्ण पेंशन की बहाली पर रिटायर कर्मचारियों की शिकायतों की जांच के लिए विशेषज्ञ कमेटी गठित करें

पूर्ण पेंशन की बहाली पर रिटायर कर्मचारियों की शिकायतों की जांच के लिए विशेषज्ञ कमेटी गठित करें

जयपुर, 18 मार्च (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने रिटायर सरकारी कर्मचारियों की ओर से पूर्ण पेंशन की बहाली को लेकर पेश शिकायतों की जांच के लिए राज्य सरकार को विशेषज्ञ कमेटी का गठन करने का सुझाव दिया है। अदालत ने कहा कि मामले में वित्तीय हितों को देखते हुए राज्य सरकार कमेटी का गठन कर सकती है, जो इस संबंध में पेंशन भोगियों की शिकायत की जांच करे। अदालत ने कहा है कि कमेटी अपनी सिफारिश छह माह में राज्य सरकार के समक्ष पेश करें और राज्य सरकार उस पर अपने स्तर पर निर्णय करे। सीजे एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह आदेश राजस्थान सेवानिवृत्त पुलिस कल्याण संस्थान व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को छूट दी है कि यदि उनकी शिकायत का निवारण नहीं होता है तो वह नए सिरे से याचिका पेश कर सकते हैं।

याचिका में अधिवक्ता एचवी नंदवाना ने अदालत को बताया कि किसी कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने पर राज्य सरकार उससे पेंशन के कम्यूटेशन का विकल्प मांगती है। यदि वह इस विकल्प पर अपनी सहमति देता है तो संबंधित रिटायर कर्मचारी को करीब आठ साल की पेंशन का अग्रिम भुगतान किया जाता है। वहीं इसके बदले 14 साल तक उसकी पेंशन से राशि काटी जाती है। जबकि अग्रिम दी गई राशि और उसके ब्याज का पुनर्भरण करीब दस साल में ही पूरा हो जाता है। याचिका में इस नियम की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए कहा गया कि 14 साल तक पेंशन से राशि कटौती होने पर रिटायर कर्मचारी को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में इस पर नए सिरे से विचार किया जाए। इसके जवाब में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि यह राज्य सरकार का नीतिगत निर्णय है। यदि याचिकाकर्ता इस संबंध में अपना अभ्यावेदन देता है तो राज्य सरकार उसकी जांच कर सकता है। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने राज्य सरकार को इस संबंध में कमेटी गठित करने का सुझाव दिया है।

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