भोपाल, 11 जून । मध्य प्रदेश में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के महत्व को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के समस्त शासकीय एवं निजी महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों के लिए विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
जनसम्पर्क अधिकारी राजेश दाहिमा ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि उच्चतम न्यायालय के 25 जुलाई 2025 के महत्वपूर्ण निर्णय के पैरा 35 में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुपालन में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में कार्यरत प्राध्यापकों, शैक्षणिक सहायकों, अधिकारियों एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि 6, 7 एवं 8 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाले इस प्रदेशव्यापी प्रशिक्षण अभियान का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रत्येक कर्मचारी को विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के प्रति जागरूक एवं संवेदनशील बनाना है, जिससे किसी भी विद्यार्थी में मानसिक तनाव, अवसाद अथवा अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं के प्रारंभिक संकेतों की समय रहते पहचान कर उसे उचित परामर्श, सहायता एवं विशेषज्ञ उपचार की दिशा में मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सके। इन प्रशिक्षणों के माध्यम से उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए अधिक संवेदनशील, सहयोगी एवं सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार शासकीय महाविद्यालयों के प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों के लिए यह ऑनलाइन प्रशिक्षण 6 जुलाई 2026 को किया जाएगा, जबकि निजी महाविद्यालयों के प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों के लिए 7 जुलाई 2026 को प्रशिक्षण होगा। इसके अतिरिक्त 8 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालयों के प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों के लिए भी इसी प्रकार का ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिससे उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति संवेदनशीलता को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।
प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों, उनकी पहचान, आवश्यक सहयोग तथा संस्थागत स्तर पर अपनाए जाने वाले उपायों की जानकारी दी जाएगी। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि सभी प्रतिभागियों को महाविद्यालय अथवा विश्वविद्यालय परिसर में एकत्रित कर एमएस-टीम्स के माध्यम से प्रशिक्षण से जोड़ा जाए। प्रशिक्षण सत्र की फोटो एवं वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से प्राध्यापकों और कर्मचारियों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ेगी तथा आवश्यकता पड़ने पर वे विद्यार्थियों को समय पर उचित मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध करा सकेंगे।