सोहा अली खान ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अपने माता-पिता की जीवन से जुड़ी कई दिलचस्प बातें साझा कीं। उन्होंने मंसूर अली खान पटौदी, जिन्हें क्रिकेट प्रेमी प्यार से ‘टाइगर’ के नाम से जानते हैं, के बारे में बताया कि उनके पापा ने खेल को हमेशा एक शौक के रूप में देखा न कि पैसे कमाने के साधन के तौर पर। सोहा ने कहा, “हम अपने आस-पास के लोगों से हमेशा प्रेरित होते हैं। मेरे लिए उस प्रेरणा का स्रोत मेरे पिता थे। जब मैं पैदा हुई, तब तक वह क्रिकेट से रिटायर हो चुके थे। उस समय क्रिकेट का उद्देश्य सिर्फ खेल का आनंद लेना था। न तो आईपीएल था और न ही इसमें फिर से विज्ञापन का चलन। उस समय क्रिकेट में आर्थिक लाभ की कोई उम्मीद नहीं थी।”
सोहा ने अपने माता-पिता के रिश्ते के बारे में भी बात की, जिसमें उनकी माँ, शर्मिला टैगोर, प्रमुख कड़ी रही हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता हमेशा उन्हें यह सलाह देते थे कि “जो भी करें, अपने दिल की सुनें।” सोहा ने यह भी खुलासा किया कि उनकी माँ ने शादी के बाद भी अपने करियर को प्राथमिकता दी। “जब माँ ने 24 वर्ष की आयु में शादी की, तब उस वक्त एक अभिनेत्री का शादी करना करियर का अंत माना जाता था। लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत जारी रखी और शादी के बाद भी अपने करियर में कुछ बेहतरीन हिट फिल्में दीं।”
शर्मिला टैगोर और मंसूर अली खान की शादी 1968 में हुई, जो उस समय बहुत चर्चित रही, क्योंकि यह एक इंटर-फेथ शादी थी। सोहा ने बताया कि उस समय उनके माता-पिता को शादी के लिए कई धमकियां मिली थीं। “किसी ने तो यह कह दिया था कि अब बोलने की जरुरत नहीं, गोलियां बोलेंगी।” सोहा ने आगे कहा, “मेरे नाना-नानी ने शादी के लिए फोर्ट विलियम की जगह बुक कराई थी, लेकिन दूल्हे के पक्ष से आर्मी संबंधी लोग ज्यादा थे, इसलिए अंतिम समय पर यह जगह बदल दी गई। अंततः एक एम्बैसडर मित्र के बड़े बंगले में उनकी शादी हुई।”
यह दंपति ने 43 साल का एक साथ जीवन बिताया, जो एक मजबूत और प्रेरणादायक संबंध का प्रतीक रहा। हालांकि, 2011 में पटौदी साहब का निधन हो गया, लेकिन उनके सिद्धांत और उनकी शख्सियत ने उनके परिवार और उनके चाहने वालों पर गहरी छाप छोड़ी है। सोहा ने अपने पेरेंट्स की कहानियों के माध्यम से यह भी दर्शाया है कि कैसे प्यार, सम्मान और अपने सपनों के प्रति प्रतिबद्धता ही जीवन को सौंदर्य दे सकते हैं। उनकी बातें हमें यह सिखाती हैं कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए अपने मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए और अपने खोले रास्ते को चुनना चाहिए।