यूट्यूबर एल्विश यादव के खिलाफ दर्ज मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सोमवार को महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। यह सुनवाई उस याचिका पर होगी जो एल्विश ने नोएडा के एक रेव पार्टी में ड्रग्स और सांप के जहर के प्रयोग के मामलों से संबंधित पेश की है। एल्विश ने याचिका में अपनी ओर से दायर चार्जशीट और समन को रद्द करने की मांग की है। यह मामला नवंबर 2023 की शुरुआत में तब शुरू हुआ जब नोएडा के सेक्टर 49 में एल्विश यादव सहित कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले की सुनवाई जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ द्वारा की जाएगी।
बता दें कि यह एफआईआर भारतीय जनता पार्टी की नेता मेनका गांधी की संस्था पीपल्स फॉर एनिमल्स की ओर से की गई थी, जिसमें कहा गया था कि एल्विश यादव दिल्ली एनसीआर के फार्महाउस में जिंदा सांपों के साथ वीडियो शूट करवाते हैं। आरोप है कि इस तरह की रेव पार्टियों में सांपों और उनके जहर का अवैध इस्तेमाल होता है। इसके साथ ही पार्टी में विदेशी लड़कियों के शामिल होने की बात भी सामने आई। विशेष रूप से, एक आरोपी राहुल यादव का ऑडियो क्लिप भी सामने आया है, जिसमें उसने पुलिस को बताया कि उसने एल्विश के रेव पार्टी में ड्रग्स पहुंचाए।
पुलिस ने राहुल के पास से 20 मिलीलीटर जहर बरामद किया था और सांपों को प्रारंभिक चिकित्सा और फॉरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा गया था। जांच में यह भी पता चला कि 5 कोबरा सांपों की विष ग्रंथियों को निकाल लिया गया था। इस मामले में एल्विश के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं और IPC की धारा 120-बी के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। यह बताया गया कि वित्तीय लाभ के लिए सांपों की अवैध तस्करी को रोकने के लिए सरकार ने कई कानून लागू किए हैं।
पीपल्स फॉर एनिमल्स संस्था ने इस मामले को उजागर करने के लिए एक स्टिंग ऑपरेशन किया। गौरव गुप्ता ने बताया कि उन्हें एल्विश यादव के सांप कनेक्शन के बारे में विश्वसनीय जानकारी मिली थी। स्टिंग के दौरान यह योजना बनाई गई कि एल्विश को रेव पार्टी में स्नेक वेनम का इंतजाम करने के लिए संपर्क किया जाए। जब पुलिस और वन विभाग ने तय समय पर कार्रवाई की तो उन्होंने 9 जिंदा सांपों के साथ 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
अब इस मामले में उच्च न्यायालय की सुनवाई का सभी को बेसब्री से इंतज़ार है, क्योंकि इस निर्णय से न केवल एल्विश यादव का भविष्य तय होगा बल्कि यह भी स्पष्ट होगा कि ड्रग्स और प्राणियों के साथ इस तरह के दुरुपयोग के खिलाफ न्याय कैसे कार्य करेगा। समाज में ऐसे मामलों की सख्त निषेध्यता को देखते हुए यह सुनवाई अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।