गुुना : अहिल्याबाई आध्यात्मिकता, धर्म और सुशासन का संगम : शर्मा

गुुना : अहिल्याबाई आध्यात्मिकता, धर्म और सुशासन का संगम : शर्मा

गुना, 30 मई (हि.स.)। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का जीवन आध्यात्मिकता, धर्म और सुशासन का संगम है। उनके जीवन की हर पंक्ति पुण्यश्लोक जैसी है। बड़े-बड़े इतिहासकारों ने उन्हे लोकमाता, लोकमंगल, प्रजावत्सला के बाद पुण्यश्लोक भी लिखा है। यह बात शुक्रवार को अहिल्याबाई जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित बुद्धिजीवी विचार गोष्ठी में मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के संभागीय संगठन मंत्री दिनेश चन्द्र शर्मा ने कही। एक निजी होटल में आयोजित गोष्ठी को शर्मा मुख्य वक्ता के रुप में संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रुप में संबोधित करते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सिकरवार ने लोकमाता के जीवन पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही जानकारी देते हुए बताया कि कल 31 मई को अहिल्याबाई जयंती पर शहर के शास्त्री पार्क से शाम 7 बजे एक शोभायात्रा निकाली जाएगी। जिसका समापन हनुमान चौराहे पर होगा। संगोष्ठी में आभा दहीभाते ने लोकमाता अहिल्या बाई के नाटक मंचन की जानकारी दी।

अहिल्या बाई को पाठ्यक्रम में नहीं होने दिया शामिल

गोष्ठी में शर्मा ने कहा कि यह देेश का दुर्भाग्य है कि हमने स्कूल-कॉलेज में अहिल्याबाई के बारे में नहीं पढ़ा। शासन करने वाले लोगों ने लंबे समय तक शिवाजी, महाराणा प्रताप, अहिल्याबाई होल्कर के बारे में पाठ्यक्रम में आने नहीं दिया।, जबकि 300 साल पहले जब देश में महिला सशक्तिकरण जैसी कोई स्थिति नहीं थी। तब एक रानी ने अपने कार्यों से महिला सशक्तिकरण का संदेश पूरे विश्व में प्रसारित किया। शर्मा के अनुसार अहिल्याबाई के कार्यों की बदौलत ही उन्हे आज मिजोरम, मेघालय से लेकर कर्नाटक, अंडमान निकोबार, केरल तक लोग याद कर रहे हैं। मुरादाबाद, उत्तराखंड, कर्नाटक में उनकी प्रतिमा स्थापित हुई।

शर्मा ने कहा कि महारानी अहिल्याबाई होल्कर अजेय रहीं। वह कभी कोई युद्ध नहीं हारीं। धर्म-संस्कृति के पुनरुत्थान के लिए उन्होंने बहुत बड़ा योगदान दिया। मणिकर्णिका घाट, हरिद्वार, प्रयाग, अयोध्या में सरयू घाट का निर्माण अहिल्याबाई होल्कर ने किया। सोमनाथ, कांची, रामेश्वरम, भीमाशंकर, श्रीशैलम में इन्होंने धर्मशालाओं का निर्माण, पीने के पानी, भंडारा की व्यवस्था की।

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