कश्मीर के पहलगाम निवासी नज़ाकत अली सर्दियों में हर साल चिरमिरी और अंबिकापुर आते हैं, जहां वे गर्म कपड़ों का व्यापार करते हैं। गर्मी के मौसम में वे अपने गृह क्षेत्र कश्मीर में टूरिस्ट गाइड के रूप में कार्यरत रहते हैं। इसी दौरान 22 अप्रैल को बेसरन घाटी में आतंकी हमला हुआ था, जब वे चिरमिरी के कुलदीप स्थापक, अरविंद अग्रवाल, हैप्पी बधावन और शिवांश जैन के परिवारों के साथ वहां मौजूद थे। अचानक हुई गोलीबारी में जब लोग जान बचाने को इधर-उधर भाग रहे थे, तब नज़ाकत अली ने अद्भुत साहस दिखाते हुए सभी 11 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
इस साल भी जब नज़ाकत अली व्यापार के लिए चिरमिरी पहुंचे, तो उनके आगमन की खबर मिलते ही युवाओं ने उन्हें सम्मानित करने की योजना बनाई। नगर के युवाओं ने फूलमालाओं और तालियों के साथ उनका स्वागत किया। नज़ाकत ने सबका आभार जताते हुए कहा, मेरा यह रिश्ता सिर्फ कारोबार का नहीं, अपनापन का है। जब जान का खतरा था, तब यही सोचकर हिम्मत आई कि मुझे अपने लोगों को सही सलामत घर लौटाना है।
हमले के बाद कश्मीर के पर्यटन कारोबार को बड़ा झटका लगा है। नज़ाकत बताते हैं, इस सीजन में पूरे घाटी का पर्यटन ठहर गया। हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं। हमें भी करीब छह महीने घर में बैठना पड़ा। आतंक का साया अब भी महसूस होता है, और कश्मीर को फिर से उठ खड़ा होने में वक्त लगेगा। नज़ाकत अली फिलहाल चिरमिरी के बाद आज शाम अंबिकापुर पहुंचे हैं, जहां वे अपने व्यापारिक कार्यों में जुटे हैं। स्थानीय लोग उन्हें बहादुरी और इंसानियत की मिसाल के रूप में देख रहे हैं।