उक्त स्कूलों में दान किए गए टीवी अब उन स्मार्ट क्लासेस की नींव बनेंगे, जहां विद्यार्थियों को पारंपरिक ब्लैक बोर्ड की जगह आकर्षक दृश्य-श्रव्य सामग्री, शिक्षण वीडियो और इंटरैक्टिव मॉड्यूल के माध्यम से पढ़ाई करवाई जाएगी। यह बदलाव बस्तर जैसे क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे दूरस्थ गांवों में पढ़ने वाले बच्चे भी डिजिटल शिक्षा के लाभों से सीधे जुड़ सकेंगे। इस पहल को पूरे क्षेत्र में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, बच्चों की सीखने की क्षमता को बढ़ाने और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने वाले महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। आभार व्यक्त करते हुए कमिश्नर डोमन सिंह ने कहा कि यह योगदान केवल उपकरण दान करने का कार्य नहीं, बल्कि बस्तर के बच्चों के उज्जवल भविष्य में एक सच्चा निवेश और शिक्षा के प्रति समाज की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। वहीं कलेक्टर श्री हरिस ने इसे बच्चों की शिक्षा सहित उनके समग्र व्यक्तित्व विकास में समाज की अतुलनीय योगदान निरूपित करते हुए कहा कि यह समाज के लोगों की जागरूक पहल का अनुपम उदाहरण है।
इसी क्रम में जनपद पंचायत लोहंडीगुड़ा में 26 नवम्बर को कई स्कूलों को टेलीविजन प्रदान किए गए। मुख्य कार्यपालन अधिकारी धनेश्वर पाण्डे ने समाज के लोगों से प्राप्त इन टीवी सेटों का वितरण किया ताकि इन विद्यालयों में जल्द से जल्द स्मार्ट क्लासेस का संचालन शुरू किया जा सके। इस पहल के अंतर्गत प्राथमिक और माध्यमिक शाला (अंग्रेजी माध्यम) धाराऊर, प्राथमिक शाला साहूपारा दाबापाल, प्राथमिक शाला बड़ांजी और प्राथमिक शाला नवीन धुरागांव को टीवी प्रदान किए गए।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती शालिनी तिवारी ने भी शिक्षा के डिजिटल रूपांतरण में अपना योगदान देते हुए माध्यमिक शाला तारागांव और प्राथमिक शाला बाघनपाल में टीवी वितरित किए। वितरण के दौरान संबंधित पंचायतों के पंचायत प्रतिनिधि, संकुल शैक्षिक समन्वयक, पंचायत सचिव, शिक्षक-शिक्षिकाएं और ग्रामीणजन उपस्थित रहे और उन्होंने इस सामूहिक प्रयास को ग्रामीण शिक्षा को नई दिशा देने वाला कदम बताया।