संदेह और अपूर्ण साक्ष्य के आधार पर नहीं ठहराया जा सकता दोषी-हाईकोर्ट

याचिका में अधिवक्ता गिरिराज प्रसाद शर्मा ने एक आरोपी की ओर से अदालत को बताया कि साल 2007 में चिरंजी लाल ने एसीबी, सीकर में रिपोर्ट की थी कि रेलवे अधिनियम के तहत रींगस थाने में दर्ज एक मामले में उसका नाम हटाने के बदले आरोपी पांच हजार रुपए की रिश्वत मांग रहे हैं। एसीबी ने 26 जुलाई को ट्रैप कार्रवाई की और दावा किया कि आरोपी कांस्टेबल सांवरमल मीणा से रिश्वत राशि मिली है। वहीं एसीबी कोर्ट ने साल 2023 में तीनों याचिकाकर्ताओं कैलाश चंद सैनी, जगवीर सिंह और सांवरमल को एक-एक साल की सजा सुनाई थी। इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि मामले में परिवादी के बयान विरोधाभासी रहे हैं। वहीं परिवादी और उसके भाई के खिलाफ दर्ज मामले को जांच अधिकारी ने चार्जशीट के लिए पहले ही आगे भिजवा दिया था। ऐसे में याचिकाकर्ता मामले में परिवादी को लाभ पहुंचाने की स्थिति में नहीं था। इसके साथ ही ट्रैप कार्रवाई के समय किसी को स्वतंत्र व्यक्ति को गवाह नहीं बनाया गया। ऐसे में एसीबी कोर्ट के आदेश को रद्द किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने एसीबी कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए याचिकाकर्ताओं को दोषमुक्त कर दिया है।