बाद में भगवान् के हृदयाह्लादकारक सुश्राव्य श्रुति, उपनिषद और देशिक स्तोत्राणि के स्तोंत्रों से महास्तुति की गयी। भगवान् रंगनाथ को वंगकड़ल करैंदा यानि समुद्र मंथन नमक पोशाक धारण कराया गया और औषधि का पान कराया गया। इसके अलावा तिरूप्पावै पाशूर, रंगनाथ गद्यम्, गोदास्टकम, गोदा स्तुति और गोदा प्रपत्ति का अनुसंधान हुआ। इस दौरान भगवान के दर्शन के लिए दिनभर भक्तों का कतार लगा रहा।
इस अवसर पर सत्यनारायण गौतम गोपेश आचार्य और नारायण दास ने मिलकर दिनभर के अनुष्ठान को विधिवत् संपन्न कराया।
दिनभर का भोग आशीष अग्रवाल और उनकी पत्नीा आश्विका अग्रवाल, मनोज तिवारी और उनकी पत्नी सुलक्षणा तिवारी एवं एक-एक समय का भोग नीलम जयसवाल और पवन कुमार अग्रवाल की ओर से निवेदन किया गया।