उत्तरकाशी, 27 जनवरी । नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में मूल काश्तकारों की सेवा समाप्त कर तथा बाहरी व्यक्तियों को नियमित रखे जाने की शिकायत को लेकर कोटी गांव के बेरोजगारों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है।
प्रेषित ज्ञापन में कहा गया है कि नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी में कई सालों से मूल काश्तकार ईमानदारी से अपनी सेवा दे रहे थे जिनको संस्थान में बैठे उच्च अधिकारियों ने अपने व्यक्तिगत हित के कारण झूठे आरोप लगाकर मूल काश्तकारों की दो माह पहले सेवा समाप्त कर दी।
केंद्र सरकार, शासन, प्रशासन को पत्राचार के माध्यम से अवगत कराया गया लेकिन आज तक कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई। पत्र में कहा गया कि कुछ लोगों को 2015 से 2018 के बीच बिना विज्ञप्ति के बैंक डोर से नियमित नियुक्ति दी गई। इसी प्रकार 2018 से 2023 में फर्जी दस्तावेज तैयार कर अपने चहेतों को बिना किसी विज्ञप्ति के संविदा में शामिल कर दिया गया और स्थानीय मूल के लोगों को धौके में रख कर दैनिक मजदूरी में दिखाया गया। जबकि मान्य न्यायालय के स्पष्ट आदेश है कि दस साल पूरे होने पर संविदा दैनिक और तदार्थ रूप से सेवा दे रहे लोगों को नियमित नियुक्ति दी जाए वहीं संस्थान कई वर्षों से सेवा दे रहे काश्तकारों को बिना कारण के संस्थान बाहर निकाल रहा है ताकि इन्हें नियमित नियुक्ति से कुछ काश्तकारों को वंचित रखा जाय।
जब संस्थान की स्थापना हुई तो उस समय शासन द्वारा शासन आदेश जारी किए गए हैं कि जिन काश्तकारों की भूमि सरकारी हितों के लिए अर्जित की जा रही है। उन परिवारों के या गांव से गरीब परिवार के एक-एक व्यक्ति को प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन संस्थान ग्रामीणों के साथ अन्यापूर्ण व्यवहार कर रहा है। संस्थान द्वारा कुछ भूमि काश्तकारों की ले रखी है। और कुछ भूमि ऐन-कैन तरीके से वन विभाग की कब्जा रखी है। जब ग्रामीण महिलाएं घास लकड़ी लेने जाते है, तो उनको जंगल में जाने से रोक दिया जाता है और गेट पर ताला लगाकर रोका जाता है। इसी भूमि पर संस्थान घास की नीलामी करवाता है। और हजारों रुपया अर्जित करता है। काश्तकारों को लकड़ी और घास से वंचित रखा जाता है।
इधर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि पूर्व में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के खिलाफ शिकायत मिली है अपर जिलाधिकारी मामले की जांच कर रहे है। प्रेषित ज्ञापन में, पार्वती, मधुबाला, बबीता, प्रेमवती आदि के हस्ताक्षर थे।