गुरुग्राम, 09 फरवरी । जिम्बाब्वे में अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल में इंग्लैंड को हराकर मैच के हीरो बने हरियाणा के झज्जर जिला के गांव कुलाना निवासी कनिष्क चौहान को हरियाणवियों ने क्रिकेट का चमकता सितारा बताया। सोमवार को जब वे पैतृक गांव जा रहे थे तो गुरुग्राम जिला के जाटोली गांव में उनका भव्य स्वागत किया गया। एस.एस. क्रिकेट अकादमी में अपने स्वागत से कनिष्क चौहान गदगद नजर आए। साथ ही उन्होंने कहा कि क्रिकेट की दुनिया में वे सदा अपने परिजनों, गांव व प्रदेश का नाम रोशन करने का प्रयास करते रहेंगें।सोमवार दोपहर को कनिष्क चौहान अपने गांव में आयोजित स्वागत समारोह के लिए जा रहे थे। इसी रूट पर जाटोली गांव में उनके स्वागत का एस.एस. क्रिकेट अकादमी में आयोजन किया गया। अकादमी पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत व अभिनंदन किया गया। अपनी जादुई गेंदबाजी और तूफानी बल्लेबाजी से अंडर-19 क्रिकेट मैच के फाइनल के अंतिम ओवर में मैच का रुख पलटने वाले कनिष्क के स्वागत में ग्रामीण और क्रिकेट प्रेमी उमड़ पड़े। कनिष्क चौहान ने एस.एस. क्रिकेट अकादमी के खिलाडिय़ों को भी प्रेरित किया। कनिष्क चौहान के अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप में जीत का सितारा बनने पर एस.एस. क्रिकेट एकेडमी संचालक श्याम चौहान, एमिनेंट पर्सन अभय चौहान, वार्ड पार्षद रवि चौहान, मंडल महामंत्री विजय चौहान, ओमबीर चौहान, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य भाजपा युवा मास्टर सुरेंद्र चौहान, श्रीपाल चौहान, डब्लू चौहान, प्रकाश चौहान, प्रमोद चौहान, सतपाल चौहान, जनक चौहान, अनिल शर्मा, राय सिंह चौहान समेत अनेक ग्रामीणों ने स्वागत करते हुए भविष्य में भी इसी तरह से भारत का नाम रोशन करते रहने का आशीर्वाद दिया।
आठ साल की उम्र में डेरा की अकादमी में चयन
बता दें कि कनिष्क चौहान ने आठ साल की उम्र में कनिष्क चौहान ने डेरा सच्चा सौदा एवं मानवता भलाई केंद्र के शाह सतनाम सिंह जी क्रिकेट स्टेडियम में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। बेहतरीन और एडवांस सुविधाओं वाले इस स्टेडियम में उन्होंने डेरा सच्चा सौदा के गद्दीनशीन संत डा. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का पावन प्रेरणा से क्रिकेट की बारीकियां सीखीं। नियमित कोचिंग दी गई। 26 सितंबर 2006 को झज्जर जिले के कुलाना गांव में जन्में कनिष्क चौहान को क्रिकेट के बेहतरीन तैयारी कराने के लिए वर्ष 2014 में उनका परिवार पैतृक गृह नगर झज्जर से सिरसा शिफ्ट हो गया। कनिष्क चौहान अपने माता-पिता प्रदीप चौहान व सरिता चौहान के इकलौते पुत्र हैं। पिता किसान हैं तो मां गृहिणी के रूप में घर का काम संभालती हैं।