अनूपपुर, 20 मार्च । मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में सिंधु समाज के नववर्ष की शुरुआत इनके प्रमुख त्योहार(चेटीचंड) आराध्य देवता भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव के रूप में शुक्रवार को जिला मुख्यालय अनूपपुर में धूमधाम से मनाया गया। इसे झूलेलाल जयंती के नाम से भी जाना जाता हैं।
भगवान झूलेलाल का जन्म सद्भावना और भाईचारा बढ़ाने के लिए हुआ था। सिंधी समाज ने इस बार दो स्था्नों में भगवान झूलेलाल का जन्म मनाया। पहला गुरूद्वारा में भगवान झूलेलाल की विधि विधान से पूजा अर्चना की गई इसे बाद भण्डारा का आयोजन किया गया। वहीं दूसरी चेतना नगर में सिंधु समाज ने मनाया। दोनो ही जगहों पर शाम को भगवान झूलेलाल की शोभायात्रा पूरे शहर में निकाल कर मड़फा तलाब में विसर्जन किया गया। एक दिन पूर्व समाज के लोगो ने 15 यूनिट रक्तदान किया जो लोगो के लिए प्रेरणादायक रहीं।
सिंधी समाज के आराध्य देव भगवान झूलेलाल साईं जी का जन्मोत्सव इस वर्ष अनूपपुर में बड़े ही श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। पूरे दिन चले धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने शहर को भक्ति और उल्लास के रंग मंक रंग दिया। समाज के लोगों ने एकजुट होकर इस पावन अवसर को ऐतिहासिक बना दिया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे भगवान झूलेलाल साईं जी की पूजा-अर्चना और आरती से हुई, जिसे पूज्य सिंधी समाज के सचिव अशोक डाबरा ने सिंधी समाज नवयुवक मंडल के पांच सदस्यों के साथ विधिवत संपन्न कराया। वातावरण में भक्ति की मधुर ध्वनि और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को और भी दिव्य बना दिया। पूजा-अर्चना के पश्चात श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। दोपहर 1 बजे से भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के साथ-साथ अन्य वर्गों के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भंडारे में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर सेवा और समरसता का संदेश दिया। आयोजन में समाज की एकता और भाईचारे की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
जन्मोत्सव के उपलक्ष्य पर एक दिन पूर्व भारतीय सिंधु समाज अनूपपुर द्वारा एक भव्य वाहन रैली निकाली गई। रैली में मातृशक्ति, नवयुवक मंडल और वरिष्ठ सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और भगवान झूलेलाल के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।
शाम 5 बजे भव्य शोभा यात्रा निकाली गई, जो सिंधी धर्मशाला से प्रारंभ होकर राम जानकी मंदिर, स्टेशन चौराहा होते हुए पूरे शहर का भ्रमण करती हुई समातपुर मंदिर मड़फा तालाब पहुंची। वहां भगवान झूलेलाल साईं जी की दिव्य ज्योति का जल प्रवाह कर कार्यक्रम का समापन किया गया। शोभा यात्रा के दौरान शहर के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं द्वारा जलपान और डण्डाम पेय से स्वागत किया गया। यात्रा के दौरान महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेष रूप से डांडिया डांस ने सभी का मन मोह लिया और पूरे माहौल को जीवंत बना दिया। हर ओर भक्ति, संगीत और नृत्य का अनूठा संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का सफल संचालन सिंधी समाज के अध्यक्ष तेजू मल भोजवानी और उपाध्यक्ष भगवान दास केवलानी के नेतृत्व में किया गया। वहीं वरिष्ठ सदस्यों परशुराम, अमर लाल केवलानी, रमेश लालवानी, अनिल थावानी, गोविंद राम थावानी और अर्जुन दास का विशेष योगदान रहा। नवयुवक मंडल के सभी सदस्यों ने भी आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर भारतीय सिंधी समाज अनूपपुर के सभी व्यापारियों ने अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर पूरे दिन भगवान झूलेलाल साईं जी का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक समृद्धि का भी संदेश दे
महत्व और कथा
धार्मिक मान्यता है कि संत झूलेलाल वरुण देव के अवतार हैं। चेटीचंड के दिन भगवान झूलेलाल की पूजा से सुख, समृद्धि का वरदान मिलता है और व्यापार में कभी कोई रुकावट नहीं आती। उपासक भगवान झूलेलाल को उदेरोलाल, घोड़ेवारो, जिन्दपीर, लालसाँई, पल्लेवारो, ज्योतिनवारो, अमरलाल आदि नामों से भी पूजते हैं।
भगवान झूलेलाल ने इसलिए लिया था अवतार
संवत् 1007 में पाकिस्तान में सिंध प्रदेश के ठट्टा नगर में मिरखशाह नामक एक मुगल सम्राट राज्य करता था. उसने जुल्म करके हिंदू आदि धर्म के लोगों को इस्लाम स्वीकार करने पर मजूबर कर दिया.उसके आतंक से तंग आकर सभी ने सिंधू नदी के किनारे एकत्रित होकर भगवान का स्मरण किया भक्तों की कड़ी तपस्या के परिणाम स्वरूप नदी में मछली पर सवार एक अद्भुत आकृति नजर आई और फिर ठीक सात दिन बाद चमत्कारी बालक ने श्रीरतनराय लोहाना के घर जन्म लिया, यही भगवान झूलेलाल कहे गए।
सिंधु समाज ने किया रक्तदान
भारतीय सिंधी समाज अनूपपुर द्वारा भगवान श्री झूलेलाल की जयंती के एक दिन पूर्व गुरूवार एक सराहनीय सामाजिक पहल करते हुए रक्तदान किया। जिसमे समाज के सदस्यों ने उत्साह और सेवा भाव के साथ 15 यूनिट रक्तदान कर मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। जिसमे समाज के युवाओं और वरिष्ठजनों का विशेष योगदान रहा। रक्तदान करने वालों में निखिल डबरा, संजय भोजवानी, सोनू केवलानी, अमित भोजवानी, मानसिंह, सुंदर दास थवानी, मनोज थावनी, ऐश्वर्या थावनी, श्याम केवलानी, नरेश भोजवानी, मुस्कान भोजवानी, जितेंद्र डबरा, मिथिलेश राजपूत, पूनम भोजवानी एवं अनिल ओटवानी सहित अन्य समाजजनों ने भाग लिया। साथ ही संदेश दिया कि रक्तदान सबसे बड़ा दान है, जो किसी जरूरतमंद की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि रक्तदान न केवल एक पुण्य कार्य है, बल्कि यह समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। इस तरह के आयोजन से लोगों में जागरूकता बढ़ती है और जरूरतमंदों को समय पर रक्त उपलब्ध हो पाता है। सभी रक्तदाताओं का सम्मान किया गया और उनके इस योगदान के लिए आभार व्यक्त किया गया। सिंधी समाज अनूपपुर की यह पहल न केवल समाज के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि त्योहारों को सेवा और मानव कल्याण से जोड़कर मनाना ही सच्ची श्रद्धा है।