मंडी, 15 अप्रैल । हिमाचल प्रदेश की छोटी काशी कहे जाने वाले मंडी जिला के डडौर स्थित होटल बी 4 यू में 5वीं बटालियन जम्मू और कश्मीर राइफल्स सूरज गोरखा का 178वां स्थापना दिवस अत्यंत उत्साह और सैन्य परंपराओं के साथ मनाया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर बटालियन के लगभग 250 पूर्व सैनिकों और पांच वीर नारियों तथा 80 पूर्व सैनिकों के परिवार के सदस्यों ने एकत्रित होकर अपनी यूनिट के गौरवशाली इतिहास को याद किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एस.एस. ग्रेवाल ने शिरकत की। उनके साथ बटालियन के तीन पूर्व कमान अधिकारी-ब्रिगेडियर वी.के. सक्सेना, कर्नल एच.एस. आहूजा तथा कर्नल एम.एस. महल विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने जवानों का हौसला बढ़ाया। वर्तमान यूनिट सूरज गोरखा की ओर से भी एक अधिकारी, दो जेसीओ और दो एनसीओ इस उत्सव का हिस्सा बनने पहुंचे।
समारोह के दौरान सूरज गोरखा की वीर गाथाओं का गुणगान किया गया। वक्ताओं ने याद दिलाया कि कैसे 13 अप्रैल 1849 को महाराजा गुलाब सिंह द्वारा बाहु किला जम्मू में इस यूनिट की नींव रखी गई थी। 1895 के चित्रांल युद्ध से लेकर 1947-48 के जम्मू-कश्मीर ऑपरेशन और कारगिल युद्ध तक, इस बटालियन ने हमेशा वीरता की मिसाल पेश की है।
इस अवसर पर बटालियन की ओर से पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को सम्मानित किया गया। पूर्व सैनिकों ने पुरानी यादें साझा कीं और अपनी रेजिमेंट के प्रति अटूट निष्ठा दोहराई।
मंच संचालन और आयोजक मंडल कार्यक्रम का सफल मंच संचालन सुभाष शर्मा द्वारा किया गया। इससे पूर्व, उच्च शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त उप-निदेशक नायक राज कुमार शर्मा ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया और स्थापना दिवस की बधाई दी। आयोजन को सफल बनाने में आयोजक मंडल के सदस्य सूबेदार राज कुमार ठाकुर, कैप्टन धर्मेंद्र ठाकुर, सूबेदार अशोक कुमार हवालदार राजेश, सूबेदार घनश्याम , सूबेदार वीरेंदर, सूबेदार नरेंद्र शर्मा, हवालदार बसंत सिंह, और हेमराज की मुख्य भूमिका रही, जिनके अथक प्रयासों का सभी ने आभार व्यक्त किया।
गौरतलब है कि 5 जैक राइफल सूरज गोरखा को अपनी विशिष्ट सेवा के लिए यूनिट साइटेशन, वीर चक्र और शौर्य चक्र जैसे अनेक सम्मान प्राप्त हैं। इस मिलन समारोह ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि फौजी कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, उसकी रगों में देशप्रेम और पलटन का गर्व सदैव जीवित रहता है।