कैथल, 21 अप्रैल । हरियाणा सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के उप-चेयरमेन धुम्मन सिंह किरमच ने कहा कि हरियाणा सरकार के अथक प्रयासों के चलते आज सरस्वती नदी में करीब 400 किलोमीटर तक पानी बह रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सरस्वती नदी के पुनर्जीवन और उससे जुड़े धार्मिक स्थलों के विकास के लिए लगातार काम कर रही है।
धुम्मन सिंह किरमच मंगलवार को हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर स्थित पिसोल गांव के प्राचीन मां सरस्वती मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा भी की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में हरियाणा सरस्वती हेरिटेज बोर्ड का गठन किया गया था। उस समय सरस्वती नदी में मात्र 10 किलोमीटर तक ही पानी बहता था और नदी विलुप्त होने के कगार पर थी। लेकिन पिछले 10 वर्षों में किए गए प्रयासों से अब 400 किलोमीटर क्षेत्र में पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया गया है।
धुम्मन सिंह किरमच ने पिसोल स्थित प्राचीन मां सरस्वती मंदिर को ऐतिहासिक और आस्था का केंद्र बताते हुए कहा कि यहां पर प्राचीन समय में सरस्वती नदी बहती थी और लोग अपने पूर्वजों के पिंडदान के लिए यहां आते थे। अब इस परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में करीब नाै लाख रुपये की लागत से घाट का निर्माण कराया जाएगा।
इसके अलावा एक नई परिक्रमा का निर्माण भी होगा, जबकि विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा एक शेड बनाया जाएगा, जिससे भंडारे और अन्य कार्यक्रमों के आयोजन में सुविधा मिलेगी। उन्होंने धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महाभारत काल में भगवान श्री बलराम ने द्वारका से आदिबद्री तक सरस्वती यात्रा की थी और इस क्षेत्र में महायज्ञ भी किया था। मंदिर में भगवान विष्णु की लगभग 1400 वर्ष पुरानी प्रतिमा भी स्थापित है, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाती है। इस अवसर पर डीडीपीओ रितु लाठर, भाजपा नेत्री शैली मुंजाल, मंदिर समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।