भारत को अधिक सजग, सक्षम और रणनीतिक रूप से तैयार रहने की आवश्यकता

पिथौरागढ़, 22 मई (हि. स.)। मध्य कमान और देहरादून स्थित थिंक टैंक के संयुक्त तत्वावधान में पिथौरागढ़ में शुक्रवार काे ‘भारत के पड़ोस में रणनीतिक संस्कृति: निरंतरता, विरोधाभास और समकालीन निहितार्थ’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में भारत को अधिक सजग, सक्षम और रणनीतिक रूप से तैयार रहने की आवश्यकता है।

संगोष्ठी का उद्देश्य भारत के पड़ोसी देशों की रणनीतिक सोच, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर उनके प्रभावों को लेकर गहन विचार-विमर्श करना था। कार्यक्रम में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, रणनीतिक विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, छात्रों एवं एनसीसी कैडेटों ने भाग लिया। वक्ताओं ने सीमा प्रबंधन, सैन्य रणनीति, ग्रे ज़ोन वारफेयर, सूचना युद्ध, अवसंरचना विकास और क्षेत्रीय प्रभाव की प्रतिस्पर्धा जैसे समकालीन विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

संगोष्ठी के दौरान पंचशूल ब्रिगेड और सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल का उद्देश्य अकादमिक सहयोग, शोध, ज्ञान आदान-प्रदान और युवाओं में रणनीतिक अध्ययन के प्रति रुचि विकसित करना है।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने युवाओं में विश्लेषणात्मक सोच, रणनीतिक जागरूकता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। संगोष्ठी का समापन तेजी से बदलते सुरक्षा वातावरण में सामूहिक तैयारी और रणनीतिक दूरदर्शिता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

इस संबंध में जानकारी देते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल चेतन सिंह कबसूड़ी, जनसंपर्क अधिकारी (रक्षा) ने बताया कि भारतीय सेना युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों के साथ संवाद बढ़ाकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर जागरूकता विकसित करने के लिए लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रही है।