हिमाचल हाईकोर्ट को मिलेंगे तीन नए जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन नामों पर लगाई मुहर

शिमला, 03 जून । हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने राज्य न्यायिक सेवा के तीन वरिष्ठ अधिकारियों चिराग भानु सिंह, भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल को हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कॉलेजियम ने 2 जून को हुई अपनी बैठक में इन नामों पर सहमति जताई।

अब यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। केंद्र की मंजूरी और राष्ट्रपति की अधिसूचना जारी होने के बाद तीनों अधिकारी हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।

वर्तमान में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सहित 12 न्यायाधीश कार्यरत हैं। इन नियुक्तियों के बाद अदालत में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ेगी, जिससे लंबित मामलों के निस्तारण में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

इनमें पहला नाम कांगड़ा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश चिराग भानु सिंह का है। उन्होंने मंडी के वल्लभ पीजी कॉलेज से स्नातक और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की। वर्ष 1994 में उन्होंने हिमाचल हाईकोर्ट में वकालत शुरू की और सिविल, आपराधिक, संवैधानिक तथा सेवा मामलों में सक्रिय रहे। वर्ष 2003 में उन्हें हिमाचल प्रदेश सरकार का उप महाधिवक्ता नियुक्त किया गया। 2007 में न्यायिक सेवा में आने के बाद उन्होंने सोलन, ऊना, चंबा और बिलासपुर सहित विभिन्न जिलों में सेवाएं दीं। औद्योगिक न्यायाधिकरण एवं श्रम न्यायालय में उनके कार्यकाल के दौरान दो वर्षों में 1500 से अधिक मामलों का निपटारा विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जाता है।

दूसरे नाम भूपेश शर्मा का है, जो वर्तमान में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार जनरल के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष 1996 में न्यायिक सेवा में शामिल होने के बाद उन्होंने धर्मशाला, मंडी, शिमला, सरकाघाट, सुंदरनगर और सोलन सहित कई स्थानों पर न्यायिक दायित्व निभाए। वे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश तथा रामपुर बुशहर, हमीरपुर, सोलन, ऊना और शिमला में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

तीसरे अधिकारी योगेश जसवाल वर्तमान में सिरमौर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं। ऊना जिले के अंबोटा गांव से संबंध रखने वाले जसवाल ने 1991 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की और शिमला में वकालत की। 1996 में न्यायिक सेवा में शामिल होने के बाद उन्होंने हमीरपुर, रोहड़ू, पालमपुर, कुल्लू, घुमारवीं, चंबा और कांगड़ा सहित कई स्थानों पर सेवाएं दीं। वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार, श्रम न्यायालय-सह-औद्योगिक न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी तथा हिमाचल प्रदेश न्यायिक अकादमी, शिमला के निदेशक भी रह चुके हैं।