हर तीसरा बच्चा प्रदूषण जनित बीमारियों से प्रभावित: डॉ. विकास पिलानिया

जयपुर, 22 जून । बढ़ता वायु प्रदूषण बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर के श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास पिलानिया ने बताया कि वर्तमान में करीब 30 प्रतिशत बच्चे अस्थमा, एलर्जी, बार-बार खांसी, सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों के संक्रमण जैसी समस्याओं से प्रभावित हैं। अस्पतालों की ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले मरीजों में भी 30 से 40 प्रतिशत एलर्जी से संबंधित होते हैं, जो बढ़ते प्रदूषण का संकेत है।

डॉ. पिलानिया ने बताया कि बच्चों के फेफड़े विकासशील अवस्था में होते हैं, इसलिए प्रदूषित हवा का असर उन पर अधिक पड़ता है। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और भविष्य में गंभीर श्वसन रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा कि पीएमटू.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कण स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक हानिकारक हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार जयपुर का एक्यूआई करीब 130 दर्ज किया गया, जो संवेदनशील वर्गों के लिए अस्वास्थ्यकर श्रेणी में आता है। राजस्थान में बढ़ते शहरीकरण, वाहनों की संख्या, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और औद्योगिक उत्सर्जन प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं।

डॉ. पिलानिया ने अभिभावकों को सलाह दी कि अत्यधिक प्रदूषण वाले दिनों में बच्चों की बाहरी गतिविधियां सीमित रखें, पौष्टिक आहार और पर्याप्त पानी दें तथा अस्थमा या एलर्जी की स्थिति में नियमित चिकित्सकीय परामर्श लें। उन्होंने कहा कि एलर्जी रोगों को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन उनका पूर्ण उपचार संभव नहीं है। इसलिए सावधानी और बचाव ही बेहतर स्वास्थ्य का आधार है। साथ ही उन्होंने समाज, उद्योगों और प्रशासन से वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।