राष्ट्र निर्माण के लिए कार्यकर्ताओं में अनुशासन और निरंतर आत्मविकास का होना जरूरी: सह-प्रांत कार्यवाह राजेश

नई दिल्ली, 28 जून । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), दिल्ली प्रांत के सह-प्रांत कार्यवाह राजेश ने कहा है कि राष्ट्र निर्माण के लिए कार्यकर्ताओं में त्याग, सेवा, अनुशासन और निरंतर आत्मविकास जैसे गुण अनिवार्य हैं।

दिल्ली प्रांत के सह-प्रांत कार्यवाह राजेश ने यह बात शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (दिल्ली प्रांत) एवं दिल्ली धाम खाटू श्याम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय प्रांतीय शैक्षिक कार्यशाला के दौरान कही। आज (रविवार) कार्यशाला का समापन था। “भारतीय ज्ञान परंपरा एवं शिक्षा के मौलिक स्वरूप को सुदृढ़ बनाना” विषय पर केंद्रित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य न्यास के कार्यकर्ताओं, शिक्षकों एवं शिक्षाविदों को भारतीय ज्ञान-परंपरा, संगठनात्मक कार्यप्रणाली और राष्ट्रीय शिक्षा के उद्देश्यों के प्रति जागरूक व सक्रिय बनाना था।

उन्होंने उपस्थित जनसमूह से “भारत को जानो, मानो, बनो और बनाओ” के मूल मंत्र को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।

प्रथम वैचारिक सत्र में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय संयोजक ए. विनोद ने “शिक्षा बचाओ आंदोलन” की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत को पुनः विश्वगुरु के पद पर आसीन करने के लिए शिक्षा व्यवस्था को भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय दृष्टि के अनुरूप पुनर्गठित करना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यालयों को नवाचार की प्रयोगशाला बनाएं और योग, सतत अध्ययन व अनुशासित कार्यशैली को अपनाएं।

कार्यशाला के दूसरे दिन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित शिक्षा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रांतीय कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि चरित्रवान, कर्तव्यनिष्ठ, संस्कारित एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण करना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रभावी क्रियान्वयन में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

खाटू श्याम दिल्ली धाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष घनश्याम गुप्ता जवेरी ने अपने संबोधन में कहा कि मूल्यपरक शिक्षा का प्रसार एक ईश्वरीय कार्य है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि दिल्ली धाम खाटू श्याम, न्यास के साथ मिलकर शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए सदैव तत्पर रहेगा।

इस दो दिवसीय आयोजन में भारतीय ज्ञान परंपरा, पंचकोश आधारित समग्र शिक्षा, मूल्यपरक शिक्षा, लक्ष्य निर्धारण, संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण और एनईपी-2020 के व्यावहारिक क्रियान्वयन जैसे विषयों पर गहन संवाद और समूह चर्चाएं हुईं। प्रतिभागियों ने विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षिक परियोजनाओं की कार्ययोजनाएं तैयार कर उनका प्रस्तुतीकरण भी किया। कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों ने देश में मूल्यनिष्ठ एवं राष्ट्रोन्मुख शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर दिल्ली के अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें मुख्य रूप से संजय स्वामी, शोभा पेडणेकर, निरंजन कुमार, प्रो. हितेश शर्मा, प्रवीण आर्य, ओ. पी. वर्मा तथा श्री विनोद शानवाल शामिल थे।