ने नंदिनी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
परिवार
के सदस्य मनजीत तिहाड़ा ने बताया कि नंदिनी का निधन सात जुलाई को बीमारी के कारण हुआ
था। वह करीब 18 वर्ष तक परिवार के साथ रही और परिवार उसे सदस्य की तरह मानता था। उनके
अनुसार नंदिनी को प्रसाद के रूप में रसगुल्ले पसंद थे, जबकि हलवा पसंद नहीं था। इसी
कारण उसकी आत्मिक शांति के लिए करीब छह क्विंटल रसगुल्ले तैयार कराए गए। श्रद्धाभोज
में आलू और पेठे की सब्जी, पूरी तथा रसगुल्ले का प्रसाद वितरित किया गया। लोगों को
परंपरागत ढंग से जमीन पर बैठाकर भोजन कराया गया।
कार्यक्रम
की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सामूहिक हवन-यज्ञ से हुई। इसमें 11 पंडितों ने
यज्ञ संपन्न कराया। इसके बाद गौ आरती की गई। श्रद्धाभोज से पहले 21 ब्राह्मणों को प्रसाद
वितरित किया गया और फिर सभी श्रद्धालुओं को भोजन कराया गया। बड़ी संख्या में लोगों
के पहुंचने को देखते हुए परिवार ने पहले से व्यापक तैयारियां की थी। परिवार के अनुसार
नंदिनी बचपन से ही उनके साथ पली-बढ़ी और उसने अपने जीवनकाल में 12 संतानों को जन्म
दिया। वर्तमान में उसकी छह संतानों की देखभाल परिवार कर रहा है। परिवार का कहना है कि नंदिनी उनके लिए केवल एक गाय नहीं, बल्कि परिवार का अभिन्न
सदस्य थी। इसी भाव के साथ उसकी तेरहवीं का आयोजन कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।