जबलपुर, 17 सितंबर । मध्य प्रदेश के मंडला जिले के बम्हनी बंजर उप तहसील कार्यालय में नामांतरण के एवज में रिश्वत मांगने के मामले में लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने गुरुवार को कार्रवाई करते हुए एक प्राइवेट कर्मचारी को 8 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। मामले में नायब तहसीलदार को भी आरोपी बनाया गया है।
लोकायुक्त एसपी अंजुलता पटले के अनुसार, आवेदक रोहणी प्रसाद चंद्रौल (55), निवासी ग्राम सिल्गी, जिला मंडला के पिता झनक लाल चंद्रौल के नाम ग्राम सिल्गी में कृषि भूमि थी। वसीयतनामा के जरिए यह भूमि आवेदक के बेटे आलोक चंद्रौल के नाम की गई थी। भूमि के नामांतरण के लिए आवेदक ने ऑनलाइन आवेदन किया था।
आवेदक जब नामांतरण की प्रक्रिया के संबंध में उप तहसील बम्हनी बंजर पहुंचा, तो वहां पदस्थ नायब तहसीलदार अजय श्रीवास्तव और उनके कार्यालय में बाबू के रूप में काम कर रहे प्राइवेट व्यक्ति हरीश सिंगौर (42), पिता रमेश प्रसाद सिंगौर, निवासी ग्राम ढेको, तहसील मंडला द्वारा नामांतरण आदेश के बदले 10 हजार रुपए रिश्वत की मांग किए जाने का आरोप है।
इसकी शिकायत आवेदक ने लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जबलपुर में की। शिकायत के सत्यापन के दौरान आरोपी 8 हजार रुपए रिश्वत लेने के लिए तैयार हो गए।
इसके बाद लोकायुक्त की टीम ने गुरुवार 17 सितंबर 2026 को उप तहसील बम्हनी बंजर कार्यालय परिसर में ट्रेप कार्रवाई की। यहां हरीश सिंगौर को 8 हजार रुपए की रिश्वती राशि लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया।
लोकायुक्त ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7, 13(1)B और 13(2) तथा बीएनएस की धारा 61(2) के तहत कार्रवाई शुरू की है।
ट्रेप दल में टीएलओ निरीक्षक शशि कला मुस्कुले, निरीक्षक राहुल गजभिए, निरीक्षक जितेंद्र यादव सहित लोकायुक्त जबलपुर के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे।