सोनिया विहार में युवक की हत्या की साजिश का पर्दाफाश, दो नाबालिग समेत सात पकड़े गए

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर । उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सोनिया विहार में मनीष यादव (34) की हत्या के मामले में पुलिस ने दो नाबालिग समेत सात आरोपितों को पकड़ा है। पुलिस की जांच में दावा किया गया है कि मनीष की पत्नी से शादी करने की कथित मंशा के चलते उसके परिचित उमेश मौर्य उर्फ मयंक ने उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची। आरोप है कि इसके लिए दो नाबालिगों को दो लाख रुपये में हत्या की सुपारी दी गई। वारदात को अंजाम देने के लिए पिस्टल, कारतूस और बाइक का इंतजाम किया गया।

पुलिस ने एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल, दो कारतूस और बाइक बरामद की है। मामले का खुलासा करने के लिए पुलिस ने 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और तकनीकी साक्ष्यों के साथ आरोपितों से पूछताछ की।

पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर की रात करीब 9:10 बजे सोनिया विहार के 4.5 पुश्ते पर एक युवक को गोली मारने की सूचना मिली। पुलिस मौके पर पहुंची तो पता चला कि मनीष यादव को उसके पड़ोसी सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर, सिविल लाइंस ले जा चुके हैं। इलाज के दौरान मनीष की मौत हो गई। शुरुआत में सूचना देने वाले विवेक सिंह (26) ने पुलिस को बताया कि हेलमेट पहने बाइक सवार दो बदमाशों ने मनीष के सिर में बेहद करीब से गोली मारी और फरार हो गए। पुलिस ने इस मामले में सोनिया विहार थाने में हत्या और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया। गवाहों के बयान और घटनाक्रम की पड़ताल में कई विरोधाभास सामने आए। पुलिस के मुताबिक, जांच में पता चला कि उमेश मौर्य ने वारदात से कुछ समय पहले मनीष को घटनास्थल पर बुलाया था।

पुलिस के मुताबिक उमेश, मनीष और उसकी पत्नी पहले से एक-दूसरे को जानते थे। उमेश के वैवाहिक संबंधों में तनाव था और तलाक का मामला अदालत में लंबित था। जांच में आरोप लगा कि उमेश मनीष की पत्नी से शादी करना चाहता था और इसी वजह से उसने मनीष की हत्या की योजना बनाई। पुलिस इस कथित साजिश में शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। उमेश और विवेक ने कथित तौर पर दो नाबालिगों को दो लाख रुपये में हत्या करने के लिए तैयार किया। वारदात में इस्तेमाल पिस्टल उत्तर जिले के झरौड़ा निवासी भीम से लेने और कारतूस उस्मानपुर के एक व्यक्ति से जुटाने की बात सामने आई है। बाइक का इंतजाम भी एक अन्य सहयोगी के जरिए किया गया था, जिसकी पहचान की जांच की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, हथियार, कारतूस और बाइक के इंतजाम में अधिकतर भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया गया था। जांच में एक नाबालिग को विवेक सिंह की ओर से किए गए कई यूपीआई लेनदेन भी सामने आए हैं। पुलिस इन लेनदेन की पड़ताल कर रही है। जांच में पुलिस को पता चला कि कथित साजिश को अंजाम देने की कोशिश 10 अक्टूबर को भी की गई थी। पुलिस के अनुसार, उस दिन उमेश मौर्य मनीष को रोहिणी से सोनिया विहार लाने गया था, जबकि एक नाबालिग 4.5 पुश्ते के पास इंतजार कर रहा था। हालांकि, मनीष ने घर लौटने से इनकार कर दिया और योजना सफल नहीं हो सकी। 13 अक्टूबर को उमेश ने मनीष से संपर्क कर उसकी लोकेशन पता की। उसे मालूम हुआ कि मनीष अपनी बहन की परीक्षा के सिलसिले में नोएडा गया था। इसके बाद उमेश, विवेक और आनंद कथित तौर पर 4.5 पुश्ते के पास इंतजार करने लगे। दोनों नाबालिग भी बाइक लेकर आसपास मौजूद थे। आनंद को मनीष के दिखाई देने पर शूटरों को संकेत देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

पुलिस की जांच में सामने आया कि मनीष को घर से बाहर निकालने के लिए उमेश ने उससे कथित तौर पर एक हजार रुपये लौटाने की मांग की। इसके बाद उसने मनीष को यूपीआई के जरिए 100 रुपये भेजे और बदले में नकद रुपये मांगे। आरोप है कि पैसे लौटाने के लिए मनीष जैसे ही घर से बाहर आया, दोनों नाबालिगों ने उसकी कनपटी पर गोली चला दी। वारदात के बाद उमेश ने घायल मनीष को उसके घर की ओर ले जाने में मदद की। बाद में पड़ोसी उसे अस्पताल ले गए।

पुलिस ने कथित तौर पर हथियार उपलब्ध कराने वाले भीम सिंह को भी गिरफ्तार किया है। पूछताछ में उसने बताया कि पिस्टल उसके भाई की थी, जिसकी करीब तीन साल पहले तिमारपुर इलाके में हत्या कर दी गई थी। पुलिस अब हथियार के स्रोत और कारतूस उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की भूमिका की जांच कर रही है। गिरफ्तार आरोपितों में विवेक सिंह (26), उमेश मौर्य उर्फ मयंक (38), आनंद (22), नितिन उर्फ नरेंद्र (32) और भीम सिंह (45) शामिल हैं। इनके साथ दो विधि-विरुद्ध कार्य में संलिप्त बच्चे (सीसीएल) भी पकड़े गए हैं।