सस्ती खरीद से नाराज किसानों ने सड़कों पर बिखेरे धान, 3 किमी तक भड़का रोष!

पंजाब के अमृतसर में शनिवार को किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने अपनी मांगों के समर्थन में एक बड़ा प्रदर्शन किया। किसान ट्रैक्टर ट्रॉलियों के जरिए धान लेकर जिला कलेक्टरेट ऑफिस पहुंचे, जहां उन्होंने जोरदार नारेबाजी के साथ अपनी आवाज उठाई। इसके बाद, वे सड़क पर धान फेंकने लगे और यह सिलसिला भंडारी पुल तक चला। लगभग 3.5 किलोमीटर के क्षेत्र में धान फेंककर किसानों ने अपनी नाराजगी का इजहार किया। उनका आरोप है कि प्राइवेट कंपनियां उनसे धान को बहुत कम कीमत पर खरीद रही हैं और बाद में वह धान ऊंची कीमतों पर बेच रही हैं, जिससे हर किसान को प्रति एकड़ 25 से 30 हजार रुपए का नुकसान हो रहा है।

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने इस प्रदर्शन के दौरान चार प्रमुख मुद्दों को उजागर किया। सबसे पहले, उन्होंने बासमती चावल की खरीद में हुई अनियमितताओं की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि जब किसान अपनी फसलों की सही कीमत तक नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं, तो गारंटी कानून की मांग का उठना स्वाभाविक है। इस साल बासमती चावल की किस्म 1509 और 1692 की खरीद अव्यवस्थित तरीके से की गई, और इसके परिणामस्वरूप किसान गंभीर आर्थिक नुकसान का सामना कर रहे हैं।

दूसरे, पंधेर ने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र को बाजार अर्थव्यवस्था से जोड़कर किसानों को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने उदाहरण दिया कि इस बार बासमती चावल को प्राइवेट खरीदारों द्वारा आधे मूल्य पर खरीदा गया है, जो कि उनकी मेहनत का अपमान है। इस नुकसान की जांच के लिए कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण किसानों में और अधिक निराशा फैल रही है।

तीसरे, उन्होंने बासमती की वर्तमान कीमतों में गिरावट की बात की। वर्तमान में बासमती का भाव 2000 से 2400 रुपए प्रति क्विंटल के बीच है, जबकि पिछले साल यह 3500 से 4000 रुपए था। इस तरह की गिरावट के चलते किसानों को प्रत्येक एकड़ में 25 से 30 हजार रुपए का सीधा नुकसान हो रहा है, और कुछ किसानों को तो अपनी बासमती 1700 रुपए तक में बेचनी पड़ी।

अंत में, पंधेर ने पंजाब सरकार के उन दावों का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि यदि बासमती का रेट 3200 रुपए से नीचे गया, तो सरकार इस घाटे की भरपाई करेगी। लेकिन अब, इस संबंध में किसी भी तरह का स्पष्ट बयान या कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह किसानों की समस्याओं का समाधान करें और उचित मूल्य सुनिश्चित करें, ताकि किसान अपने हक के लिए संघर्ष न करें। प्रदर्शन के जरिए किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपने आंदोलन को जारी रखेंगे।