पंजाब पुलिस की लेडी इंस्पेक्टर अर्शप्रीत कौर ग्रेवाल ने डीएसपी रमनदीप सिंह पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। यह घटना तब सामने आई जब अर्शप्रीत को नशा तस्करों को 5 लाख रुपए लेकर छोड़ने के आरोप में निलंबित कर दिया गया। अर्शप्रीत का कहना है कि उन्हें औरर्नर अधिकारी द्वारा बदनाम करने की साजिश के तहत यह झूठा मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए इस पूरे मामले का जिक्र किया और इसके खिलाफ मोगा के एसएसपी व डीजीपी से शिकायत करने की योजना बनाई है। इसके साथ ही, उन्होंने उच्च न्यायालय, पंजाब महिला आयोग, और राष्ट्रीय महिला आयोग तक मामले को ले जाने की बात कही है।
अर्शप्रीत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उल्लेख किया कि आरोप बिल्कुल निराधार हैं और उन्होंने दर्शाया कि यह सब एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अगर वह समय रहते उच्च अधिकारियों के पास अपनी बात रख पातीं, तो शायद यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। अर्शप्रीत ने कहा, “मैंने अपने नाम को बचाने की कोशिश की, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कोई बोलने में सक्षम नहीं था।” उन्होंने स्पष्ट किया कि जब उन्होंने डीएसपी रमनदीप को ना कहा, तो उन्हें यो़जना के तहत परेशान किया गया।
इसके साथ ही, अर्शप्रीत ने बाली मर्डर केस में भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि एक निर्दोष युवक की हत्या के प्रकरण में जब उन्होंने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की, तब उन्हें अधिकारियों द्वारा परेशानी का सामना करना पड़ा। अर्शप्रीत ने कहा कि इस प्रकरण से जुड़े अधिकारियों ने उन्हें और अधिक समस्या में डालने की कोशिश की, जिसका उन्हें कतई अंदाज़ा नहीं था।
ज्वारभाटा के बाद, अर्शप्रीत ने इस बात पर जोर दिया कि पंजाब सरकार उन्हें न्याय दिलाने में मदद करे, क्योंकि उन्होंने दो बहुत गंभीर मामलों का सामना किया है। उन्होंने बताया कि कैसे उनके खिलाफ एक एफआईआर दर्ज करवाई गई, जो पूरी तरह से झूठी थी, और इस प्रक्रिया में उसे सरकारी प्रक्रिया की अवहेलना की गई थी। अर्शप्रीत ने एसएसपी मोगा के साथ-साथ उच्च अधिकारियों से अपील की है कि वे इस मामले को गंभीरता से लें।
अधिकारियों के बीच इस मामले में चुप्पी बनी हुई है और मोगा पुलिस द्वारा कोई खुलासा नहीं किया गया है। भारतीय पुलिस सेवा के डीजीपी गौरव यादव ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सभी आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी और उनकी पॉलिसी के अनुसार सत्यापन के बाद कार्रवाई होगी। उनका यह वादा इस मामले में पुलिस महत्वाकांक्षा को स्पष्ट करता है कि किसी भी अधिकारी को बचाया नहीं जाएगा।
इस संपूर्ण मामले ने पंजाब पुलिस में आंतरिक विवाद और पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर किया है। अर्शप्रीत कौर ग्रेवाल का यह संघर्ष न केवल उनके व्यक्तिगत मामले के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह युवा पुलिस अधिकारियों के लिए एक संदेश भी है कि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं और अन्याय के खिलाफ खड़े रहें।