खनौरी बॉर्डर जाते किसानों को बठिंडा पुलिस ने बीच हाईवे पर हिरासत में लिया!

भारतीय किसान यूनियन (सिद्धिपुर) के प्रदेश अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल को पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद कई किसान खनौरी बॉर्डर की ओर बढ़ने लगे। उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ बठिंडा क्षेत्र से बड़ी संख्या में किसान एकत्रित हुए। पुलिस ने बठिंडा-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर जेठूके गांव में बैरिकेड लगाकर किसानों को रोकने का प्रयास किया। इससे नाराज किसानों ने सड़क को जाम करने की कोशिश की, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

जगजीत सिंह डल्लेवाल को पुलिस ने खनौरी बॉर्डर से गिरफ्तार करके लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में भर्ती कराया। यह घटना तब हुई जब डल्लेवाल ने आज सुबह से अनशन पर बैठने का निर्णय लिया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद किसानों का गुस्सा उभरा, और उन्होंने विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। जिन किसानों ने खनौरी की दिशा में कदम बढ़ाए, उन्हें बार्नाला जिले की सीमा पर पुलिस ने रोक लिया, जिससे उनकी संख्या में और भी वृद्धि हुई।

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने यह स्पष्ट किया है कि पंजाब सरकार द्वारा डल्लेवाल की गिरफ्तारी को वह बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की इस कार्यवाही का तीखा विरोध किया जाएगा। किसानों का मानना है कि उनके नेता की गिरफ्तारी सिर्फ उनके आंदोलन को दबाने का प्रयास है। उन्होंने ये भी कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा और वे और भी सख्त कदम उठाने के लिए तैयार हैं।

यह घटनाक्रम किसानों की एकता का प्रतीक है, जिसमें विभिन्न जिलों से किसान अपने नेता के समर्थन में खड़े हुए हैं। किसानों का कहना है कि वे अपने हक के लिए लड़ते रहेंगे और जब तक केंद्र सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। जत्था-बंधी ये किसान एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा करने के लिए सजग हैं, और उनका यह साहस अडिग है।

हालांकि पुलिस प्रशासन ने इस मामले में सख्ती दिखाई है, लेकिन किसानों का जज्बा किसी भी प्रकार की बाधा को पार करने के लिए तैयार है। उनका यह आंदोलन न केवल डल्लेवाल के लिए है, बल्कि पूरे किसानों के हक और उनकी आवाज को उठाने के लिए भी है। अगर सरकार ने उनकी मांगों के प्रति ध्यान नहीं दिया, तो किसान और भी उग्र हो सकते हैं, जिससे यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है। इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रियाएँ भी महत्वपूर्ण रहेंगी, क्योंकि पूरे पंजाब में किसान जागरूक और एकजुट हैं।