सिख कर्मचारियों को एयरपोर्ट्स पर किरपाण पहनने की अनुमति दिलाने के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने एक 5 सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति शीघ्र ही नागरिक उड्डयन मंत्री के समक्ष इस विषय को उठाने की तैयारी कर रही है। समिति के सदस्यों ने गुरु पर्व के अवसर पर पाकिस्तान जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए वीजा की संख्या में कमी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। इस संबंध में समिति पाकिस्तान के दूतावास से संवाद स्थापित कर इस मुद्दे को उठाने का निर्णय लिया है। यह महत्वपूर्ण फैसला मंगलवार को नई कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया।
एसजीपीसी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एयरपोर्ट्स पर सिख कर्मचारियों को किरपाण पहनने से रोकना न केवल दुखद है, बल्कि यह सिख संस्कृति और धार्मिक पहचान पर चोट करने के समान है। उन्होंने इस मामले को और गंभीरता से लेते हुए कहा कि हाल ही में कनाडा में एक हिंदू मंदिर पर हुए हमले को लेकर सिख समुदाय को गलत तरीके से दोषी ठहराना, सिखों को बदनाम करने की पूर्व-नियोजित साजिश है। धामी ने कहा कि इस संबंध में सरकार से चर्चा करने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही बनाया जाएगा।
इस बीच, एसजीपीसी प्रधान ने सुधार लहर के बागी नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से नकार दिया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अकाली दल के कार्यकारी प्रधान बलविंदर सिंह भूंदड़ और खुद धामी साहिबान के बीच गुपचुप मिलन की बात गलत है। धामी ने कहा कि ऐसा कोई दबाव उनके ऊपर नहीं है, बल्कि आरोप लगाने वाले ही इस परिदृश्य को बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आरोप केवल स्थिति को भटकाने के लिए लगाए जा रहे हैं।
धामी ने आगे कहा कि एसजीपीसी और अकाली दल की कार्यकारी समिति का मुख्य उद्देश्य सिखों के अधिकारों की रक्षा करना है और इस दिशा में वे लगातार प्रयासरत रहेंगे। उन्होंने बागियों के आरोपों को तर्कहीन बताते हुए सिख समुदाय में एकता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि इस प्रकार की गतिविधियाँ केवल समुदाय को कमजोर करने का कार्य कर रही हैं, और सभी को मिलकर इसके विरुद्ध खड़ा होना चाहिए।
समिति के गठन और पिछले दिनों के घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि एसजीपीसी सिख समुदाय के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए कटिबद्ध है। एयरपोर्ट्स पर सिख कर्मचारियों को उनकी पहचान के साथ कार्य करने का अधिकार दिलाने के लिए यह आयोजन न केवल एक कदम है, बल्कि यह सिख संस्कृति की गरिमा को भी बनाए रखेगा। एसजीपीसी अब इस मुद्दे को और आगे ले जाने के लिए तत्पर है और उम्मीद की जा रही है कि इस बार सकारात्मक परिणाम निकलेंगे।