पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की सख्ती के बाद, पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग ने तीन नगर परिषदों – तरनतारन, डेरा बाबा नानक और तलवाड़ा के चुनाव दो मार्च 2025 को कराने का निर्णय लिया है। चुनाव के तुरंत बाद मतगणना की जाएगी। इस संबंध में आदेश, राज्य निर्वाचन आयुक्त राज कमल चौधरी द्वारा जारी किए गए हैं। इन तीनों क्षेत्रों में चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी रूप से संपन्न कराने की जिम्मेदारी जिला निर्वाचन अधिकारियों के shoulders पर होगी। चुनाव प्रक्रिया के दौरान निगरानी के लिए कैमरे लगाए जाएंगे और पुलिस की ओर से उचित सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे।
चुनाव की नामांकन प्रक्रिया 17 फरवरी से शुरू होगी, और आयोग सोमवार को चुनाव कार्यक्रम से संबंधित अधिसूचना जारी करेगा। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 17 फरवरी से 20 फरवरी 2025 के बीच होगी। संबंधित नगर परिषदों के राजस्व अधिकार क्षेत्र में चुनावी अधिसूचना जारी होने के साथ ही आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी। गौरतलब है कि चुनाव से जुड़ी मतदाता सूचियों की प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है, और शनिवार को इन सूचियों की अंतिम प्रकाशना की गई।
यह मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा था क्योंकि पंजाब की लगभग 43 नगर काउंसिलों और 5 नगर निगमों के चुनाव समय पर नहीं हो पाए थे, जिससे स्थानीय निवासियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। इसके बाद मामला पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में गया, जहां अदालत ने शीघ्र चुनाव कराने का आदेश दिया। हालांकि, सरकार ने इस आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सर्वोच्च न्यायालय ने 11 नवंबर को पंजाब सरकार को आदेश दिए थे कि उसे 10 हफ्तों के भीतर चुनाव संपन्न कराने होंगे। शीर्ष अदालत ने चुनाव की अधिसूचना जारी करने के लिए 15 दिन और चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए 8 हफ्तों की समय सीमा तय की।
दिसम्बर में कुछ चुनाव हुए थे, लेकिन इन तीन नगर परिषदों के चुनाव लटक गए थे। इसके चलते एडवोकेट भीष्म किंगर ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दाखिल की। हालिया सुनवाई में, उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को कड़ी फटकार लगाई, यह कहते हुए कि चुनावी प्रक्रिया में देरी से लोकतंत्र का मजाक उड़ा दिया गया है। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया कि चुनाव 10 मार्च तक करवाए जाएंगे, लेकिन उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि यह सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है।
इस प्रकार, पंजाब स्टेट निर्वाचन आयोग अब चुनाव प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए कृतसंकल्पित है, ताकि स्थानीय निवासियों को बिना किसी समस्या के लोकतंत्र में अपनी आवाज उठाने का अवसर मिल सके।