न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और अन्य मसलों को लेकर चल रहे किसान आंदोलन में आज (22 फरवरी) केंद्र सरकार के साथ छठी बार बातचीत होने जा रही है। यह बैठक चंडीगढ़ में होगी, जिसमें केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज चौहान और प्रह्लाद जोशी के अलावा कई अन्य अधिकारी भी शामिल होंगे। किसानों की मेहरबानी से इस वार्ता का नेतृत्व संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के प्रमुख जगजीत सिंह डल्लेवाल और किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर करेंगे। 28 किसान नेता बैठक में शामिल होंगे, जिनमें डल्लेवाल को खनौरी बॉर्डर से एम्बुलेंस के जरिए चंडीगढ़ लाया जाएगा। पहले भी 14 फरवरी को वह एक बैठक में शामिल हुए थे, जिसमें उन्होंने केंद्र के साथ बातचीत को सकारात्मक बताया था। वहीं, सरवन सिंह पंधेर ने आगामी 25 फरवरी को दिल्ली कूच करने की योजना बनाई है, आशा व्यक्त की जा रही है कि वार्ता का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है।
इस बीच, शुक्रवार को युवा किसान शुभकरण सिंह की बरसी पर उनकी याद में श्रद्धांजलि दी गई। बठिंडा के बल्लो गाँव में उनकी प्रतिमा स्थापित कर उन्हें सम्मानित किया गया। शंभू, खनौरी और रतनपुर बॉर्डर पर भी श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें किसानों की बड़ी संख्या शामिल थी। यह याद ताजा हैं कि शुभकरण की मौत उस दौरान हुई थी जब किसान खनौरी बॉर्डर से दिल्ली की दिशा में बढ़ रहे थे, और उन पर पुलिस कार्रवाई में उन्हें गोली लगी थी। किसानों का आरोप है कि यह गोली हरियाणा पुलिस की थी, जबकि पुलिस ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया था।
किसान आंदोलन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण घटनाक्रम इस प्रकार हैं: पहली, हरियाणा पुलिस ने 2024 में शंभू बॉर्डर को बंद कर दिया था, जिसके खिलाफ व्यापारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने शंभू बॉर्डर खोलने का आदेश दिया, लेकिन हरियाणा सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि किसानों ने दिल्ली कूच की कई कोशिशें की, लेकिन हर बार हरियाणा पुलिस ने उन्हें रोक दिया। आखिरी बार 14 दिसंबर को उस प्रयास को भी विफल कर दिया गया।
इसके अलावा, किसान नेता जगजीत डल्लेवाल ने अनशन शुरू किया था, जो बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। हालांकि, उन्हें पहले पंजाब पुलिस ने हिरासत में लिया, परंतु वे वहीं अनशन करते रहे और किसान संगठनों के दबाव के चलते 1 दिसंबर को उन्हें रिहा किया गया। उनके स्वास्थ्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई बार सुनवाई हुई। इसके बाद 14 फरवरी को केंद्र सरकार ने फिर से बातचीत का एक मौका दिया, जिसे डल्लेवाल ने स्वीकार किया।
इन घटनाओं के बीच, आगामी बैठक में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्रीय सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का परिणाम क्या निकलता है। यदि सरकार सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ती है, तो संभव है कि किसानों की मांगें पूरी हो सकें। यह किसानों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण हो सकता है, जिससे उनकी समस्याओं का समाधान हो सके।