15 साल बाद बेटे को मिली पिता की पहचान, सड़क पर भीख मांगते हुए मिली दुखद खबर!

पंजाब के फाज़िल्का जिले में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना सामने आई है, जिसमें मानसिक समस्याओं से जूझ रहे एक व्यक्ति की सड़क पर मौत हो गई। बलवंत सिंह (55) नाम के इस व्यक्ति ने 15 साल पहले अपना घर-परिवार छोड़ दिया था, और यह घटना इस लिहाज से बेहद दुखद है कि उनके बेटे को अपने पिता का चेहरा केवल उनके निधन के बाद ही देखने का मौका मिला। बलवंत सिंह का मकान गांव पक्का चिश्ती में था और वे मेहनत-मजूरी करके अपना जीवन यापन करते थे।

बलवंत की जिंदगी में उस समय बदलाव आया जब उनकी एक बाजू टूट गई। इस घातक घटना के बाद वे गहरे मानसिक तनाव में चले गए और लगभग 15 साल पहले अपने घर-परिवार को छोड़कर चले गए। उन्होंने अपनी सम्पत्ति भी बेच दी और अपनी पत्नी व दो छोटे बच्चों को पीछे छोड़ दिया। उस समय उनके छोटे बेटे की आयु मात्र एक साल थी, जिससे उनकी अनुपस्थिति ने परिवार पर कितना गहरा असर डाला, यह समझा जा सकता है।

मृतक के साले महेंद्र कुमार और भाई वरिंदर सिंह ने बताया कि बलवंत पिछले 15 वर्षों में सड़कों पर भीख मांगकर अपनी जीविका चला रहे थे। स्थानीय निवासी राजिंदर सिंह ने जानकारी दी कि बलवंत की पत्नी अपने बच्चों के साथ चली गई थी और उन्होंने बच्चों का अकेले ही पालन-पोषण किया। इस प्रकार, बलवंत का जीवन कठिनाइयों से भरा हुआ रहा और उनके संघर्षों का कोई अंत नजर नहीं आ रहा था।

बलवंत सिंह की मृत्यु के बाद, एक स्थानीय सामाजिक संस्था ने उनके शव को अस्पताल की मोर्चुरी में पहुंचाया। तीन दिन बाद उनकी पहचान की गई, जिससे उनका परिवार जानकारी प्राप्त कर सका। जैसे ही उन्होंने सुना, परिवार तुरंत अस्पताल पहुंचा, और वहां पोस्टमॉर्टम के बाद बहुत ही दुख के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में यह स्पष्ट होता है कि अंततः परिवार को उस व्यक्ति की याद आती रही, जिसने अपने मानसिक तनाव के चलते उन्हें छोड़ दिया, और अब परिवार के सदस्यों को अपने प्रिय व्यक्ति को खोने का गहरा दर्द सहन करना पड़ा।

इस घटना ने समाज में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के प्रति जागरूकता फैलाने की आवश्यकता को उजागर किया है। ऐसे कई लोग हैं जो मानसिक समस्याओं का सामना करते हैं और उचित सहायता के बिना जीवन के कठिन संघर्ष करते हैं। यह कहानी सिर्फ बलवंत सिंह की नहीं है, बल्कि ऐसे अनगिनत लोगों की कहानी है, जो अपने जीवन में अकेलेपन और मानसिक बीमारियों से जूझते हुए हमारे बीच रहते हैं।