सहारनपुर में वक्फ कानून को लेकर जारी विवाद ने राजनीतिक गलियारों में गरमा गर्मी पैदा कर दी है। मुस्लिम समुदाय इसे अपने धार्मिक अधिकारों पर हमले के रूप में देख रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इसे सरकारी संपत्तियों को वापस लाने की कार्रवाई के रूप में प्रदर्शित कर रही है। इस मुद्दे पर मुस्लिम नेताओं, धर्मगुरुओं और भाजपा नेताओं के बीच बयानबाजी जारी है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भाजपा सरकार पर तीखा आरोप लगाया है, asserting that मुसलमानों को निशाना बनाकर वक्फ बोर्ड को बर्बाद किया जा रहा है। दूसरी ओर, मुस्लिम धर्मगुरु कारी इसहाक गौरा ने वक्फ संपत्ति को अल्लाह की संपत्ति बताया है, जबकि भाजपाई नेता चौधरी अजीत सिंह इसके दस्तावेज मांगे हैं।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने वक्फ बोर्ड से संबंधित मामलों पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान हमें धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है, परंतु वर्तमान में इसे सीधे तौर पर चुनौती दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार वक्फ संपत्तियों को निशाना बना रही है और इसका प्रबंधन किसी अन्य तरीके से करने की कोशिश कर रही है। मसूद के अनुसार, वक्फ बोर्ड केवल एक संस्थागत संस्था नहीं है, बल्कि हमारे लिए एक धार्मिक दायित्व है। उनकी बातों से स्पष्ट होता है कि बीजेपी की नीतियों की वजह से मुसलमानों का आक्रोश बढ़ रहा है।
इमरान मसूद ने आरोप लगाया है कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि 44 क्लॉज को केवल डेढ़ घंटे में निपटा दिया गया, जिसके कारण निर्णयों की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। इससे उन्हें यह आभास हुआ है कि सरकार जल्दबाजी में और नफरत की राजनीति कर रही है। इसके साथ ही, उन्होंने मणिपुर में हुए हालात पर भी सरकार की आलोचना की, यह बताते हुए कि केंद्र ने उस क्षेत्र की समस्याओं को अनदेखा किया है, जिससे हिंसा बढ़ी है।
मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना कारी इसहाक गोरा ने वक्फ संपत्तियों को लेकर सरकार के हालिया कदमों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे अल्लाह की अमानत बताते हुए कहा कि इसके गलत इस्तेमाल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार, जो लोग वक्फ संपत्तियों पर अधिकार जमाने का प्रयास कर रहे हैं, वे सीधे अल्लाह के खिलाफ हैं। मौलाना ने यह भी कहा कि यदि सरकार ने वक्फ संपत्ति में हस्तक्षेप किया, तो वे उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए तैयार हैं।
भाजपा नेता चौधरी अजीत सिंह ने इस मुद्दे पर जोरदार पलटवार करते हुए कहा कि अगर वक्फ संपत्ति अल्लाह की है, तो इसके कागजात प्रस्तुत किए जाने चाहिए। उनका कहना है कि देश की संपत्ति किसी विशेष धर्म की नहीं हो सकती और माफियाओं द्वारा वक्फ संपत्तियों पर कब्जा जमाया गया है। उन्होंने इमरान मसूद से सवाल किया कि क्या उनके पास वक्फ संपत्तियों के कागजात हैं? उनके इस बयान से स्पष्ट होता है कि भाजपा इस मुद्दे को अपने लाभ के लिए भुनाने के प्रयास में है।
इस पूरे घटनाक्रम में, मुस्लिम संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि वक्फ संपत्तियों पर किसी प्रकार की छेड़खानी की गई, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करने के लिए तैयार हैं। यह स्पष्ट है कि सहारनपुर में वक्फ कानून को लेकर चल रही बयानबाजी ने न केवल धार्मिक समुदायों के बीच का तनाव बढ़ा दिया है, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण को भी प्रभावित किया है।