विधायक जयकृष्ण पटेल का खुलासा: घूस से पहले माइनिंग बिजनेस में साझेदारी की थी मांग!

**भारत आदिवासी पार्टी (BAP) विधायक जयकृष्ण पटेल की गिरफ़्तारी: 20 लाख की रिश्वत और उसके पीछे की कहानी**

हाल ही में भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक जयकृष्ण पटेल को 20 लाख रुपये की घूस लेते हुए पकड़ा गया। शिकायतकर्ता, रविंद्र सिंह, ने आरोप लगाया कि विधायक पटेल उसकी माइंस बिजनेस में भागीदार बनने की इच्छा रखते थे। विधायक ने इस संबंध में पूरी जानकारी जुटा रखी थी और शिकायतकर्ता पर दबाव बनाए रखने के लिए करौली के माइनिंग इंजीनियर से भी संचित संबंध बनाए थे। यह रिश्वत का मामला तब गर्मा गया, जब शिकायतकर्ता ने विधायक के एक फोन कॉल के माध्यम से माइनिंग इंजीनियर से कहा था कि अब इस मामले में ठंड रखने के लिए कह दिया जाए। ऐसा प्रतीत होता है कि विधायक अपनी मंशा को पूरा करने के लिए बेहद उत्सुक थे, जिसके चलते वह बार-बार शिकायतकर्ता से संपर्क कर रहे थे।

शिकायतकर्ता रविंद्र ने 4 अप्रैल को इस मामले की शिकायत की, जिसके बाद 18 अप्रैल को विधायक पटेल ने रविंद्र को वॉट्सएप कॉल कर घूस की राशि जल्दी देने की मांग की। हालांकि, जब रविंद्र ने विधायक को कॉलबैक किया, तो विधायक बेहद नाराज हुए और कहा कि उन्हें किसी को 10 लाख रुपये अर्जेंट में देने हैं। इसके बाद उन्होंने रविंद्र को बांसवाड़ा आने के लिए कहा। इस बीच, एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) ने विधायक को रडार पर लेना शुरू कर दिया था।

25 अप्रैल को, विधायक पटेल ने फिर से रविंद्र को वॉट्सऐप कॉल किया, जिसमें उन्होंने पूछा कि वह कहां हैं। इसके चलते एसीबी की टीम ने शिकायतकर्ता के दोस्त बनकर बांसवाड़ा पहुंचने का प्लान बनाया। बाद में, रविंद्र और एसीबी टीम ने विधायकों के निर्दशानुसार आचरण करते हुए बांसवाड़ा में विधायक से मिलने के लिए निर्धारित किया। विधायक की तरफ से शुरुआत में कुल 2.5 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, लेकिन बाद में 20 लाख रुपये पर सहमति बनी।

1 मई को, जब रविंद्र ने विधायक से मिलने की कोशिश की, तो विधायक ने उसे अपनी चचेरी भाई विक्की को पैसे देने के लिए कहा। एसीबी के निर्देशानुसार, रविंद्र और विक्की के बीच दो मई को रुपये का लेन-देन होने वाला था। 4 मई को दोपहर में एसीबी ने योजना के अनुसार विधायक के आवास पर छापा मारा। विधायक ने ही अपनी बातों में कहा था कि माइनिंग में शिकायतकर्ता को पार्टनर बनाना है और उन्होंने करौली के माइनिंग इंजीनियर को भी फोन कर कहा था कि इस मामले में ढील बरतनी है।

इस दौरान, एसीबी अधिकारियों ने विधायक पटेल को रंगे हाथ पकड़ लिया। हालांकि, विक्की वहां से भागने में सफल हो गया। करौली के माइनिंग इंजीनियर धर्म सिंह मीणा ने मामले में अपनी भूमिका को नकारते हुए कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी। विधायक के खिलाफ यह मामला कई सवाल खड़े करता है और राजनीति में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की महत्ता को उजागर करता है। यह पूछने पर कि क्या विधायक की विधायकी पर असर पड़ेगा, अनेक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोषी साबित हुए, तो उन्हें कठोर सजा का सामना करना पड़ेगा।

यह मामला न केवल भ्रष्टाचार की सच्चाई को उजागर करता है, बल्कि आम जनता में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता फैलाने का काम करेगा। एसीबी द्वारा उठाए गए कदम निश्चित रूप से सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा सकते हैं।