एसीसी प्लांट बचाने को लेकर संघर्ष समिति का गठन, 29 मई को निकलेगी पदयात्रा

पश्चिमी सिंहभूम, 24 मई । झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के झींकपानी स्थित जोड़पोखर पंचायत भवन के समीप रविवार को एसीसी बचाओ संघर्ष समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता रमेश बालमुचू ने की। बैठक में एसीसी प्लांट को बचाने और क्षेत्र के लोगों के रोजगार की सुरक्षा को लेकर व्यापक जनआंदोलन चलाने पर सहमति बनी।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि झींकपानी-टोंटो क्षेत्र का एसीसी प्लांट इस इलाके की पहचान और आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ रहा है। आजादी से पहले स्थापित यह प्लांट वर्षों से हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन बना हुआ है। मजदूरों, किसानों, ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों, दुकानदारों, ठेकेदारों और छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस प्लांट पर निर्भर है। ऐसे में प्लांट के बंद होने की आशंका से पूरे क्षेत्र में चिंता और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

संघर्ष समिति के सदस्यों ने कहा कि यदि एसीसी प्लांट बंद होता है, तो क्षेत्र में बेरोजगारी और पलायन तेजी से बढ़ेगा। स्थानीय बाजारों की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होंगी और छोटे व्यवसायों पर गंभीर संकट गहरा जाएगा। इसके साथ ही बच्चों की शिक्षा और क्षेत्र की ऐतिहासिक औद्योगिक पहचान पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।

वक्ताओं ने कहा कि अब समय केवल चर्चा करने का नहीं, बल्कि जनदबाव बनाकर प्लांट को बचाने के लिए निर्णायक संघर्ष करने का है।

बैठक के दौरान आंदोलन को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से संघर्ष समिति का विस्तार किया गया। सर्वसम्मति से रमेश बालमुचू को संयोजक, शाशि मुंडा को सह-संयोजक, गुरुचरण मुंडा को कोष प्रभारी तथा सुरेश सवैया को सह-कोष प्रभारी बनाया गया।

समिति ने निर्णय लिया कि एसीसी प्लांट को बचाने की मांग को लेकर 29 मई को क्षेत्र के सैकड़ों लोग पदयात्रा निकालेंगे। पदयात्रा के माध्यम से जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर सरकार तक क्षेत्रवासियों की भावनाएं, समस्याएं और मांगें पहुंचाई जाएंगी।

बैठक के दौरान संघर्ष समिति की ओर से सभी लोगों से आंदोलन में शामिल होकर एकजुटता दिखाने और क्षेत्र के भविष्य की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की गई।

बैठक में मानकी मुंडा, पंचायत प्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के सदस्य, बुद्धिजीवी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। इनके अलावा रमेश बालमुचू, शाशि मुंडा, गुरुचरण मुंडा, सुरेश सवैया समेत कई ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित थे।————–