अधिकमास : श्री जगदीश मन्दिर जीवागंज में 56 भोग के महोत्सव का हुआ आयोजन

मंदसौर, 14 जून । मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष में जीवागंज स्थित श्री जगदीश मंदिर में मंदिर ट्रस्ट एवं गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज जनकूपुरा पंचायत के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को 56 भोग महोत्सव का आयोजन किया गया।

सांयकाल मन्दिर चौक में 56 भोग की सामग्री का नैवेद्य लगा कर साढ़े सात बजे महा आरती की गई। इस दौरान मन्दिर के बाहर श्रद्धालु दर्शनार्थियों की लम्बी कतारें लग गई। रात्रि लगभग 11 बजे तक दर्शन चलते रहे। 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान श्री जगदीश मन्दिर में 56 भोग के दर्शन किए। जीवागंज में अपार भीड़ देख किसी बड़े तीर्थ का सा वातावरण उत्पन्न हो गया। हजारों की संख्या में एकत्र श्रद्धालुओं को व्यवस्थित दर्शन हो सके इस हेतु यातायात पुलिस द्वारा यहां स्टॉपर लगाए गए थे। महिला पुरुष दोनों की अलग कतारें लगी। भगवान जगदीश का बड़ा ही अदभुत श्रृंगार किया गया था।

पुरूषोत्तम (अधिक) मास के अवसर पर केशव सत्संग भवन, खानपुरा में पुरूषोत्तम (अधिक) मास के शुभ अवसर पर पूज्य पाद स्वामी श्री सत्यव्रत चैतन्य जी नर्मदा तट द्वारा रामचरित मानस का वाचन एक जून से प्रारंभ किया जा रहा है, जिसका समापन आज 15 जून को होगा।

रविवार को रामचरित मानस शास्त्र का वाचन करते हुए स्वामी सत्यव्रत चैतन्य महाराज ने बताया कि रामसेतु निर्माण के बाद प्रभु श्रीराम की सेना समुद्र के उसपार पहुंची और सबसे पहले युद्ध नीति के अनुसार प्रभु श्रीराम ने अंगद को शांतिदूत बनाकर रावण के समक्ष भेजा और अंगद ने प्रभु श्रीराम का संदेश रावण को दिया लेकिन रावण नहीं माना और अंगद ने रावण का संदेश श्रीराम को दिया और फिर शुरू हुआ प्रभु श्रीराम और रावण का युद्ध।

धर्मसभा में स्वामीजी ने बताया कि उसी प्रकार एक युद्ध हमारे अंदर भी चलता रहता है गृहस्थ जीवन में जीना भी एक युद्ध के समान है प्रतिदिन कई चुनौतियां सामने आती है जिनका सामना हमें डटकर करना होता है। स्वामी जी ने बताया कि कामनाएं प्रतिदिन बढ़ती जाती है जो हमारे वैराग्य को प्रभावित करती है लेकिन हमें दृढइच्छा शक्ति के बल पर इस पर विजयप्राप्त करना चाहिए। स्वामीजी ने बताया कि युद्ध सभी राक्षसों का उद्धार करने के बाद प्रभुश्री राम ने विभिषण के कहे अनुसार रावण की नाभि से अमृत निकालकर उसका भी उद्धार किया। इस प्रकार युद्ध में प्रभु श्रीराम की विजय हुई और प्रभु ने अपने वादे के अनुसार विभिषण को लंका का राजा बनाया और प्रभु अयोध्या के लिए निकले। अब आज अधिकमास के अंतिम दिन रामचरित मानस का समापन होगा और प्रभु श्री राम के अयोध्या आगमन और उनके राजतिलक का वृतांत सुनाया जायेगा।