जयपुर, 28 जून । जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की अधूरी योजना और समुचित सर्वेक्षण के अभाव में जगतपुरा, रामनगरिया और आसपास की कॉलोनियों को जलभराव से राहत दिलाने के लिए शुरू की गई 45 करोड़ रुपये की ड्रेनेज परियोजना तीन वर्ष बाद भी अधूरी पड़ी है। मार्च 2023 में शुरू किए गए इस कार्य को एक वर्ष में पूरा किया जाना था, लेकिन जून 2026 तक भी परियोजना अपने लक्ष्य से काफी दूर है।
जेडीए ने जगतपुरा और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की समस्या के समाधान के लिए करीब 17 किलोमीटर लंबी ड्रेनेज लाइन बिछाने की योजना बनाई थी। इसके तहत जगतपुरा आरओबी, सात नंबर चौराहा, एनआरआई चौराहा और अक्षयपात्र चौराहा सहित विभिन्न स्थानों से हाईटेंशन लाइन क्षेत्र तक ड्रेनेज लाइन डालकर वर्षा जल का निकास द्रव्यवती नदी में किया जाना था। यह परियोजना तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा बजट में घोषित 142 करोड़ रुपये के ड्रेनेज कार्यों का हिस्सा थी। प्रारंभिक चरण में कार्य तेज गति से चला, लेकिन बाद में विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई।
जेडीए के अधिशासी अभियंता सुरेंद्र पंवार ने बताया कि कई स्थानों पर तकनीकी बाधाओं के कारण ड्रेनेज लाइन का कार्य लंबे समय से रुका हुआ है। वर्तमान परिस्थितियों में परियोजना को पूर्ण करना फिलहाल संभव नहीं दिखाई दे रहा है। परियोजना के दौरान केंद्रीय विहार क्षेत्र में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की पाइपलाइन के कारण करीब 700 मीटर हिस्से का कार्य प्रभावित हुआ। हालांकि हाल ही में पाइपलाइन को स्थानांतरित कर दिया गया है, लेकिन कार्य अभी भी शुरू नहीं हो सका है।
इसी प्रकार वीआईटी रोड पर इंडियन ऑयल की पाइपलाइन के कारण भी निर्माण कार्य अटका हुआ है। इस कारण जगतपुरा से इंदूणी फाटक, सात नंबर क्षेत्र से एसआईटी तथा रामनगरिया की दिशा में ड्रेनेज नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा अब तक नहीं जुड़ पाया है। परियोजना के तहत प्रस्तावित 17 किलोमीटर में से अब तक केवल लगभग 6 किलोमीटर ड्रेनेज लाइन ही डाली जा सकी है। करीब 5 किलोमीटर कार्य भूमि उपलब्ध नहीं होने तथा 3 किलोमीटर कार्य विभिन्न यूटिलिटी लाइनों की बाधा के कारण लंबित है।
सूत्रों के अनुसार परियोजना शुरू करने से पहले पर्याप्त सर्वेक्षण और बाधाओं का आकलन नहीं किया गया। इसके चलते कार्य शुरू होने के बाद विभिन्न विभागों की पाइपलाइनें, भूमि संबंधी समस्याएं और अन्य तकनीकी अड़चनें सामने आती रहीं। परियोजना का निर्माण कार्य निजी कंपनी शिव कंडेम प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया था। कंपनी अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं में भी विलंब के कारण चर्चा में रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधूरे निर्माण कार्य के कारण जलभराव की समस्या जस की तस बनी हुई है। कई स्थानों पर ड्रेनेज लाइन के लिए खोदे गए हिस्से खुले पड़े हैं। बारिश के दौरान मिट्टी धंसने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। निर्माण कार्य वाले क्षेत्रों में सड़कों का पुनर्निर्माण भी अभी तक नहीं किया गया है, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।