एचपीयू स्थापना दिवस पर एसएफआई ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

शिमला, 22 जुलाई । हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर बुधवार को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने विश्वविद्यालय में पारदर्शिता, वित्तीय जवाबदेही, प्रशासनिक सुधार और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

एसएफआई ने कहा कि विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं है, यह आत्ममंथन का भी समय है। संगठन का कहना है कि पिछले 57 वर्षों में विश्वविद्यालय ने प्रदेश को बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक, प्रशासक और सामाजिक कार्यकर्ता दिए हैं। ऐसे में इसकी साख और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना जरूरी है।

ज्ञापन में एसएफआई ने कहा कि विश्वविद्यालय लगातार आर्थिक संकट का हवाला देकर विद्यार्थियों पर फीस बढ़ोतरी का बोझ डाल रहा है। संगठन का दावा है कि सूचना के अधिकार (आरटीआई), नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट और विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड वित्तीय तथा प्रशासनिक अनियमितताओं की ओर संकेत करते हैं। एसएफआई ने कहा कि विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने से पहले सार्वजनिक धन के उपयोग की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

संगठन ने निजी और सरकारी महाविद्यालयों के निरीक्षण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग भी की। एसएफआई का कहना है कि निरीक्षण तय मानकों के अनुसार होना चाहिए और इसमें किसी तरह की अनियमितता या पक्षपात की गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए।

ज्ञापन में विभागाध्यक्षों की नियुक्ति के लिए सभी विभागों में समान नीति लागू करने की मांग की गई है। एसएफआई का कहना है कि यदि किसी विभाग में सहायक आचार्य को विभागाध्यक्ष बनाया जा सकता है तो यही व्यवस्था अन्य विभागों में भी समान रूप से लागू होनी चाहिए।

एसएफआई ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम, 1970 की धारा 2(15) के कथित उल्लंघन का भी मुद्दा उठाया। संगठन ने आरोप लगाया कि शिक्षक की परिभाषा से जुड़े मामलों में समानता के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

संगठन ने कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत हुई कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच की मांग दोहराई। एसएफआई का कहना है कि यूजीसी के वर्ष 2010 के नियमों के विपरीत पदोन्नति, पूर्व सेवाओं की गणना और एरियर भुगतान जैसे मामलों की स्वतंत्र जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। संगठन ने एक ही अकादमिक परफॉर्मेंस इंडिकेटर (एपीआई) के आधार पर भर्ती और पदोन्नति किए जाने तथा कम समय में सहायक आचार्य से प्रोफेसर बनने के मामलों की भी जांच की मांग की।

ज्ञापन में विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों और ईआरपी परियोजना में संभावित वित्तीय अनियमितताओं की भी जांच की मांग की गई। एसएफआई का कहना है कि निर्माण परियोजनाओं की लागत में बढ़ोतरी और ईआरपी प्रणाली पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी उसका पूरी तरह लागू नहीं होना गंभीर विषय है। उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग प्रक्रिया की तकनीकी और वित्तीय जांच की भी मांग की गई है।

एसएफआई ने हिमाचल प्रदेश में छात्र संघ चुनाव प्रत्यक्ष मतदान से फिर शुरू करने की मांग भी उठाई। संगठन का कहना है कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार बहाल किए जाने चाहिए।

संगठन ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, पारदर्शिता और शैक्षणिक गुणवत्ता मजबूत करने के लिए इन सभी मामलों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए।