नाटो ने इटली पर यूक्रेन के लिए किए वादे में रुकावट डालने का लगाया आरोप

मास्काे/हेग, 01 जुलाई । यूरोपीय देशों के बीच रूस के खिलाफ यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता को लेकर मतभेद सामने आए हैं। इसमें इटली पर नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइज़ेशन (नाटाे) की दीर्घकालिक योजना में बाधा डालने का आरोप लगा है।

जर्मन अखबार फ्रैंकफर्टर एल्गेमीन ज़िटुंग (एफएजैड) के हवाले से रूस की अंतरराष्ट्रीय सरकारी समाचार टेलीविजन नेटवर्क रूस टुडे (आरटी) ने बताया कि हाल ही में ब्रुसेल्स में हुए समझौते में 2026 के लिए लगभग 70 बिलियन (7,69,120 करोड़ रुपये) की सैन्य सहायता पर सहमति बनी लेकिन 2027 के बाद की सहायता को लेकर इटली ने आपत्ति जताई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इटली इस शर्त से सहमत नहीं है जिसमें नाटाे को भविष्य में भी यूक्रेन को “कम से कम समान स्तर” की सैन्य सहायता जारी रखने की प्रतिबद्धता देनी थी। इस कारण प्रस्ताव के कुछ हिस्सों को फिलहाल अनिश्चित रखा गया है और अंतिम निर्णय लंबित है।

आगामी 7 जुलाई को अंकारा में होने वाले नाटाे के सालाना शिखर सम्मेलन से पहले गुरुवार को राजदूतों के बीच बातचीत का एक नया दौर तय है। हालांकि, इटली ने रूस के साथ संघर्ष के दौरान लगातार कीव का समर्थन किया है लेकिन लगातार घरेलू आर्थिक दबावों के बीच उसने बिना किसी समय-सीमा वाले वादों का विरोध किया है।

पिछले महीने, रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने संसद को बताया था कि रोम नाटाे की ‘प्रायोरिटाइज़्ड यूक्रेन रिक्वायरमेंट्स लिस्ट’ (PURL) का समर्थन नहीं करेगा, जो कीव के लिए अमेरिकी हथियार खरीदने के लिए फंड देने की योजना है। प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने भी संकेत दिया है कि इटली यूरोपीय संघ की रक्षा-वित्त पोषण योजनाओं से अलग रह सकता है; उनका तर्क है कि रोम को अगले साल होने वाले चुनाव से पहले बढ़ती ऊर्जा लागत को प्राथमिकता देनी चाहिए।

मेलोनी की गठबंधन सरकार में अहम सहयोगी, उप-प्रधानमंत्री माटेओ साल्विनी ने यूक्रेन को दी जाने वाली मदद की आलोचना करते हुए कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि और हथियार भेजने से संघर्ष का समाधान होगा। पिछले साल यूक्रेन में हुए बड़े भ्रष्टाचार घोटालों के दौरान साल्विनी ने कहा था कि अतिरिक्त फंड से देश में भ्रष्टाचार और बढ़ सकता है।

इसके अलावा, नाटाे के कुछ सदस्यों ने ग्रुप के भीतर बोझ बांटने को लेकर भी चिंता जताई है। स्वीडन की विदेश मंत्री मारिया माल्मर स्टेनरगार्ड ने पिछले साल शिकायत की थी कि नॉर्डिक देशों (नॉर्डिक देश उत्तरी यूरोप और उत्तरी अटलांटिक के एक भू-राजनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्र को कहते हैं) की कुल आबादी 3 करोड़ से भी कम है, फिर भी वे यूक्रेन को मिलने वाली नाटाे की सैन्य मदद का एक-तिहाई हिस्सा देते हैं। उन्होंने उस समय कहा था, “यह स्थिति लंबे समय तक नहीं चल सकती। यह किसी भी तरह से उचित नहीं है। इससे नॉर्डिक देशों के योगदान का तो पता चलता ही है लेकिन इससे यह भी पता चलता है कि दूसरे देश क्या नहीं कर रहे हैं।”

रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि प्रस्तावित 70 बिलियन पैकेज का बड़ा हिस्सा पहले से तय यूरोपीय देशऋण और सदस्य देशों के योगदान पर आधारित है, जबकि अमेरिका इस विशेष फंडिंग पहल में शामिल नहीं है।

रूस ने लंबे समय से पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन को दी जा रही सैन्य सहायता की आलोचना की है और दावा किया है कि इससे संघर्ष और लंबा खिंच रहा है तथा नाटाे की भूमिका और अधिक प्रत्यक्ष होती जा रही है।