अजमेर, 20 अगस्त। अजमेर के पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश नेतृत्व द्वारा चुनाव प्रबंधन के लिए दिए गए नागौर प्रभारी के दायित्व को भी छोड़ दिया है। उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता त्यागने की घोषणा डिजीटल माध्यम से सोशल मीडिया पर की। भाजपा शहर जिला अध्यक्ष रमेश सोनी ने कहा कि इस्तीफे सोशल मीडिया पर नहीं दिए जाते।
उधर, गहलोत ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर राजनीतिक द्वेषता में डीएलबी द्वारा उन्हें दो नोटिस भिजवाए जाने के कथित आरोप लगाए है। गहलोत ने कहा कि उन्हें डीएलबी द्वारा दो नोटिस प्राप्त हुए हैं और उनसे जवाब मांगा गया है। एक शिकायत वर्ष 2021 की है जबकि दूसरी महापौर के समय की है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से राजनीतिक मतभेद और वैचारिक मतभेद हो रखे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव में मुझ पर दबाव बनाने के लिए यह कार्रवाई की गई है। ऐसे में मेरी नैतिक जिम्मेदारी है कि जब तक यह मामला निष्पादित नहीं हो जाता। तब तक कांग्रेस भी चुनाव में इस मुद्दे को उठा सकती है। ऐसे में भाजपा कटघरे में आ सकती है।
इस मामले में भाजपा के शहर अध्यक्ष रमेश सोनी से बात की तो उनका कहना था कि इस्तीफा कभी भी सोशल मीडिया पर नहीं दिया जाता। इसके लिए पार्टी ने एक प्रक्रिया बना रखी है। इसके तहत इस्तीफा जिला अध्यक्ष को सौंपा जाता है और जिला अध्यक्ष के जरिए प्रदेश भाजपा को भिजवाया जाता है। वहां पर पार्टी निर्णय करती है कि इस मामले में क्या करना है? इसको स्वीकार करना है या फिर अस्वीकार करना है।
इस संबंध में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने कहा कि अपने ही नेताओं को धमकाना लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल उठाता है। जयपाल ने भाजपा पर अपने ही नेताओं और पूर्व जनप्रतिनिधियों को कथित रूप से डराने-धमकाने और दबाव में रखने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो संदेश का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा में असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। डॉ. जयपाल ने कहा कि जो नेतृत्व अपने ही नेताओं के सम्मान और सुरक्षा को गारंटी नहीं दे सकता, वह आम जनता के अधिकारों की रक्षा कैसे करेगा?