रांची, 01 अगस्त । रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में शनिवार को ‘नेशनल केमिस्ट्री डे’ उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने की।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने सभी शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को नेशनल केमिस्ट्री डे की शुभकामनाएं देते हुए भारतीय रसायन विज्ञान के जनक आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे (पीसी रे) के योगदान को याद किया। उन्होंने घोषणा की कि रांची विश्वविद्यालय की ओर से प्रत्येक वर्ष आचार्य पीसी रे के नाम पर शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए चार रिसर्च फेलोशिप प्रदान की जाएंगी।
भारतीय रसायन विज्ञान के जनक आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे के जन्मदिवस 2 अगस्त को प्रतिवर्ष नेशनल केमिस्ट्री डे मनाया जाता है। इस वर्ष दो अगस्त को रविवार होने के कारण विश्वविद्यालय ने एक दिन पूर्व, 1 अगस्त को ही कार्यक्रम का आयोजन किया। इस वर्ष दिवस की थीम ‘इको अल्केमिया-2026’ रखी गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी के डीन एवं रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. डॉ. राम सिंह उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथियों में बीआईटी मेसरा के प्रो. डॉ. सुमित मिश्र तथा इग्नू स्कूल ऑफ एजुकेशन के प्रो. डॉ. गौरव शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद पीजी रसायनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. स्मृति सिंह ने नेशनल केमिस्ट्री डे के महत्व और आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे के जीवन एवं वैज्ञानिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। स्वागत भाषण विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के निदेशक डॉ. ए.के. डेल्टा ने दिया।
इस मौके पर आईक्यूएसी की ओर से प्रकाशित न्यूजलेटर ‘पर्सपेक्टिव’ का कुलपति एवं अतिथियों ने संयुक्त रूप से विमोचन किया। साथ ही विश्वविद्यालय के मास कम्युनिकेशन विभाग के मनोज शर्मा द्वारा संकलित आचार्य पीसी रे की जीवनी पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा।
आज ही के दिन हुई थी ऑक्सीजन की खोज : प्रो. राम सिंह
मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. राम सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि यह सुखद संयोग है कि रांची विश्वविद्यालय नेशनल केमिस्ट्री डे मना रहा है और इसी दिन, 1 अगस्त 1774 को ऑक्सीजन की खोज भी हुई थी। उन्होंने कहा कि रसायन विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। इसका उपयोग इस प्रकार किया जाना चाहिए कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य अधिक सुरक्षित और समृद्ध बन सके।
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक रसायन विज्ञान का समन्वय कर प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के समाधान तथा जैव विविधता और जीवों के संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
शोध और नवाचार पर देना होगा जोर
विशिष्ट अतिथि प्रो. डॉ. गौरव ने कहा कि रसायन विज्ञान के क्षेत्र में वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए अनुसंधान और नवाचार को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। साथ ही केमिस्ट्री की पढ़ाई को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप रोजगारपरक बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।
वहीं बीआईटी मेसरा के प्रो. डॉ. सुमित मिश्र ने स्लाइड प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि रसायन विज्ञान हमारे दैनिक जीवन के प्रत्येक पहलू में मौजूद है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि शिक्षा के साथ-साथ इनोवेशन पर भी विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि रसायन विज्ञान के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में विकास और नई संभावनाओं का सृजन हो सके।
विश्वविद्यालय की साइंस डीन डॉ. वंदना ने आचार्य पीसी रे के वैज्ञानिक योगदान और उनके राष्ट्र निर्माण में निभाई गई भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
‘अणु टू एटम’ नृत्य-नाटिका ने बांधा समां
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में पीएफए विभाग के छात्र-छात्राओं ने बिपुल नायक के निर्देशन में ‘अणु टू एटम’ शीर्षक से आकर्षक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। प्रस्तुति में महर्षि कणाद, चरक, सुश्रुत सहित भारत की वैज्ञानिक परंपरा और महान ऋषियों के योगदान को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भारतीय ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध विरासत से परिचित कराया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपाली तथा रसायनशास्त्र विभाग की शोधार्थी सरना ने संयुक्त रूप से किया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार, सीसीडीसी, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, रसायनशास्त्र विभाग की डॉ. नीलम, डॉ. गुरुजन साहू, डॉ. नीरज सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।————-