कक्षा में प्रयोगों के जरिए सीखेंगे विद्यार्थी, शिक्षक हुए प्रशिक्षित

चम्पावत, 21 सितंबर । विज्ञान और गणित विषयों को प्रयोगात्मक एवं नवाचार आधारित तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) लोहाघाट में माध्यमिक स्तर के शिक्षकों के लिए तीन दिवसीय आई-राइज (इंस्पायरिंग इंडिया इन रिसर्च, इनोवेशन एंड स्टेम एजुकेशन) कार्यशाला शुरू हुई। कार्यशाला में जिले के चारों विकासखंडों से 60 विज्ञान और गणित शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं।

कार्यशाला का शुभारंभ जीआईसी लोहाघाट के प्रधानाचार्य घनश्याम भट्ट, डायट प्राचार्य दिनेश खेतवाल, वरिष्ठ प्रवक्ता कृष्ण सिंह ऐरी, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. कमल गहतोड़ी और सह-समन्वयक डॉ. अनिल कुमार मिश्रा ने दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यशाला के दौरान शिक्षकों को स्टेम एजुकेशन आधारित 60 शिक्षण किट उपलब्ध कराई गई हैं। इन किटों के माध्यम से 12 सत्रों में इकोसिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मैकेनिज्म, गणितीय आगमन, त्रिकोणमिति, खाद्य विज्ञान, विद्युत परिपथ, संख्या सिद्धांत, दैनिक जीवन में रसायन विज्ञान और ध्वनि सहित विभिन्न विषयों को छोटे-छोटे प्रयोगों के माध्यम से समझाया जा रहा है।

कार्यक्रम का फोकस शिक्षकों को ऐसी प्रयोगात्मक शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराना है, जिनके माध्यम से विद्यार्थी किसी अवधारणा को केवल पढ़ने के बजाय उसे देखकर और स्वयं करके समझ सकें। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षक विभिन्न गतिविधियों में स्वयं भाग लेकर यह भी सीख रहे हैं कि इन्हें विद्यालयों में किस प्रकार प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।

कार्यक्रम समन्वयक डॉ. कमल गहतोड़ी ने बताया कि जिले में वर्ष 2024 से 2026 के बीच करीब 180 शिक्षकों को इनोवेशन स्टार के रूप में प्रशिक्षित किया जा चुका है। कार्यशाला में अनीस अहमद, पारस जुकरिया, बेला रानी, नेहा जोशी, पवन कुमार और कमल कापड़ी इनोवेशन चैंपियन के रूप में प्रशिक्षण में सहयोग कर रहे हैं।

कार्यक्रम को शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में कार्यरत राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग प्राप्त है। डायट प्राचार्य दिनेश खेतवाल ने कहा कि प्रशिक्षण में प्राप्त प्रयोगात्मक ज्ञान को शिक्षक विद्यालयों में विद्यार्थियों के साथ साझा करें, ताकि विज्ञान और गणित के प्रति उनकी जिज्ञासा और रुचि बढ़े।

कार्यशाला में शामिल प्रशिक्षणार्थी शिक्षिका ने कहा कि प्रयोग आधारित गतिविधियों से कठिन अवधारणाओं को सरल और व्यवहारिक तरीके से समझने में मदद मिल रही है। प्रशिक्षण के बाद इन गतिविधियों को कक्षा-कक्ष में विद्यार्थियों के साथ प्रयोग करने का प्रयास किया जाएगा।