रायपुर, 4 अक्टूबर (हि. स.)। हसदेव अरण्य के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी विवाद एक बार फिर तेज हो गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया है कि, तारा कोल ब्लॉक की नीलामी आखिर कब रद्द होगी? बैज ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से नीलामी रोकने के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।
तारा कोल ब्लॉक की प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी सितंबर में पूरी होने की पुष्टि छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम ने की थी। निगम के मुताबिक नीलामी में नौ बोलियां प्राप्त हुई थीं और ब्लॉक सीजी सिन एंड गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड को मिला है। निगम ने यह भी कहा था कि खनन शुरू करने से पहले सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां हासिल करनी होंगी।
बैज का आरोप है कि, तारा कोल ब्लॉक करीब 5,000 एकड़ में फैला है और इसका बड़ा हिस्सा घने जंगल से घिरा हुआ है। कांग्रेस का दावा है कि खनन परियोजना से बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और वन्यजीवों के आवास पर असर पड़ सकता है। बैज ने विशेष रूप से लेमरू एलीफेंट रिजर्व और हाथियों के आवागमन के रास्तों को लेकर चिंता जताई है।
दीपक बैज ने कहा कि हसदेव अरण्य क्षेत्र के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के लिए राज्य सरकार ने दिसंबर 2025 में केंद्रीय कोयला मंत्रालय को पत्र लिखा था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पिछली कांग्रेस सरकार ने तारा सहित नौ कोल ब्लॉकों को नीलामी से अलग रखने की मांग की थी, तो भाजपा सरकार ने तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के लिए केंद्र को अनुशंसा क्यों की?
यह मुद्दा पहले भी राजनीतिक विवाद का केंद्र रहा है। सितंबर में बैज ने इसी सवाल को उठाते हुए राज्य सरकार पर तारा ब्लॉक की नीलामी का रास्ता साफ करने का आरोप लगाया था।
बैज ने तारा के साथ केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि हसदेव अरण्य में खनन परियोजनाओं के जरिए जंगल और आदिवासी क्षेत्रों पर दबाव बढ़ रहा है।
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक केते एक्सटेंशन परियोजना के लिए 1,742.60 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन का प्रस्ताव है। केंद्र के वन संबंधी दस्तावेज में इसे राजस्थान सरकार की बिजली कंपनी आरवीयूएनएल को आवंटित एक ग्रीनफील्ड ओपन-कास्ट कोयला खनन एवं वॉशरी परियोजना बताया गया है।
इस परियोजना को लेकर पर्यावरणीय मंजूरी को राष्ट्रीय हरित अधिकरण में भी चुनौती दी गई है। सितंबर 2026 में एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच में मामले को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
दीपक बैज ने कहा कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में खनन से जंगल, जलस्रोत, वन्यजीवों और आदिवासी समुदायों की पारंपरिक आजीविका पर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि कई गांवों में खनन परियोजनाओं का विरोध किया जा रहा है और ग्राम सभाओं ने भी प्रस्ताव पारित किए हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार से तारा कोल ब्लॉक की नीलामी पर अपना रुख स्पष्ट करने और यह बताने की मांग की कि नीलामी रद्द करने के लिए सरकार क्या कदम उठाएगी।
हालांकि, तारा कोल ब्लॉक के संबंध में सरकारी पक्ष यह है कि नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और खनन शुरू करने से पहले आवश्यक वैधानिक मंजूरियां लेना अनिवार्य होगा।