चंदेरी, 30 अक्टूबर । मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के नगर पालिका परिषद चंदेरी में ठेकेदारों के भुगतान और कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ठेकेदार मोनू पुरोहित ने एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लंबित होने का दावा किया है। वहीं, मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) प्रदीप शर्मा के बयान के बाद नगर पालिका की पुरानी भुगतान व्यवस्था और वित्तीय अभिलेखों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
हाल ही में सीएमओ प्रदीप शर्मा ने कहा था कि संबंधित ठेकेदार की ओर से प्रस्तुत फाइलों में वैध वर्क ऑर्डर और हस्ताक्षर उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि नियमानुसार आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने पर भुगतान किया जा सकता है। इसके विपरीत, ठेकेदार का दावा है कि वह वर्ष 2019 से नगर पालिका के विभिन्न आयोजनों में टेंट, लाइट और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का काम करता आ रहा है तथा उसके पास संबंधित कार्यादेश भी उपलब्ध हैं।
सीएमओ के बयानों में पूर्व में करोड़ों रुपये की फर्जी फाइलें तैयार किए जाने संबंधी बात सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। यदि नगर पालिका में पहले भी फर्जी अथवा संदिग्ध भुगतान फाइलें तैयार होने की समस्या रही है, तो यह जानना जरूरी है कि ऐसी फाइलें किन परिस्थितियों में तैयार हुईं। किन नगर पालिका अध्यक्षों के कार्यकाल में ये फाइलें बनीं, किन सीएमओ और अधिकारियों ने उनका परीक्षण किया तथा किनके हस्ताक्षरों से भुगतान स्वीकृत किए गए?
इस संबंध में संवाददाता ने सीएमओ प्रदीप शर्मा से कथित फर्जी फाइलों के माध्यम से हुए भुगतानों, उनकी जवाबदेही और पूर्व वर्षों में पदस्थ अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल किए। आरोप है कि सीएमओ ने सवालों का स्पष्ट जवाब देने के बजाय विषय बदल दिया। संवाददाता द्वारा रिकॉर्डेड जानकारी मांगे जाने पर उन्होंने रिकॉर्डेड बयान देने से भी इंकार कर दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू), नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, जिला कलेक्टर अशोकनगर तथा मध्यप्रदेश शासन से नगर पालिका चंदेरी के वित्तीय अभिलेखों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। जांच में पुराने और वर्तमान भुगतान, कार्यादेश, बिल, स्वीकृति प्रक्रिया तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका का परीक्षण किया जाना जरूरी बताया जा रहा है।
नगर पालिका का यह मामला केवल एक ठेकेदार के भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़ा है। यदि वर्षों से संदिग्ध फाइलों के माध्यम से भुगतान किए जाने की बात सही पाई जाती है, तो यह भी सामने आना चाहिए कि फाइलें किसने तैयार कीं, किसने उनका सत्यापन किया, किस स्तर पर स्वीकृति दी गई और भुगतान किसके आदेश पर हुआ।
अब निगाहें शासन, नगरीय प्रशासन विभाग और ईओडब्ल्यू की संभावित कार्रवाई पर हैं। चंदेरी नगर पालिका के पुराने और वर्तमान संदिग्ध भुगतानों की निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है। सार्वजनिक धन के उपयोग का पूरा हिसाब पारदर्शी तरीके से सामने आना चाहिए।
